डॉक्टरों को इलाज के दाैरान लिए गए निर्णयों के लिए ठोस और वैज्ञानिक आधार मिल सकेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। कल्याण सिंह सुपरस्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में शनिवार को यह जानकारी ‘क्वालिटी ऑफ एविडेंस’ कार्यशाला में दी गई।
कैंसर संस्थान के निदेकश प्रो. एमएलबी भट्ट ने कहा कि यह कार्यशाला नीति निर्माताओं, चिकित्सकों और मरीजों तीनों के लिए फायदेमंद साबित होगी। केंद्र और राज्य सरकार को मजबूत और भरोसेमंद वैज्ञानिक साक्ष्य मिलेंगे। इसकी सहायता से प्रभावी और कल्याणकारी स्वास्थ्य नीतियां बनाई जा सकेंगी। डॉ. आयुष लोहिया ने बताया कि कार्यशाला में मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, आईसीएमआर के वैज्ञानिक, विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल थे। कार्यशाला आईसीएमआर–डीएचआर के 'सारांश–2' प्रोजेक्ट के तहत आयोजित की गई। कार्यशाला में एम्स, केजीएमयू, बीएचयू और केएसएसएससीआई जैसे प्रमुख संस्थानों के डॉ. रिजवान, डॉ. अदिति मोहता, डॉ. अभिषेक जयसवाल, डॉ. फरहाद अहमद, डॉ. प्रदीप खार्या, डॉ. रामा शंकर रथ, डॉ. बालेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. गीतिका पंत और डॉ. इंदुबाला मौर्या शामिल थे।