नई ड्रग को डिजाइन करना और विकसित करने की प्रक्रिया जहां ज्यादा समय लेने
वाली होती है।
वहीं इसके महंगे होने से नई दवा की खोज की संख्या कम हो
जाती है। इससे दवा के दाम भी बढ़ जाते हैं।
इससे निपटने के तरीके लखनऊ
स्थित बायोटेक पार्क और केंद्र सरकार का बायोटेक्नोलॉजी विभाग सुझाएगा।
विशेषज्ञों द्वारा ये सुझाव तीन दिवसीय कार्यशाला में दिए जाएंगे।
कार्यशाला जानकीपुरम के बायोटेक पार्क में 24-26 अक्तूबर तक चलेगी।
बायोइंफोर्मेटिक्स सेंटर के संयोजक सुनील कुमार गुप्ता के मुताबिक कार्यशाला में नई तकनीक की मदद से ड्रग डिस्कवरी को सस्ता बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।