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Lucknow News: किला मोहम्मदी नाले को सुधारने का काम कागज पर, जलभराव से जूझेगी तीन लाख आबादी

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किला मोहम्मदी नाला।
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लखनऊ। आशियाना, एलडीए कॉलोनी और आसपास के इलाकों को हर साल बरसात में होने वाले जलभराव से बचाने के लिए किला मोहम्मदी नाले की रीडिजाइनिंग योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है, जबकि यह योजना करीब डेढ़ साल पहले ही मंजूर हो चुकी है। बजट भी पास हो चुका है और जिम्मेदारी जल निगम की सीएंडडीएस इकाई को दी जा चुकी है। इसके बावजूद काम धरातल पर शुरू नहीं हो सका है। नतीजतन, इस बार फिर करीब 3 लाख की आबादी को भीषण जलभराव का सामना करना पड़ेगा।
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समस्या की मुख्य वजहें
अधूरा निर्माण व गलत लेवल : आशियाना, एलडीए कॉलोनी और आसपास के कई इलाकों का पानी किला मोहम्मदी नाले से ही निकलता है। वर्ष 1983-1986 के बीच बना यह 40 किमी लंबा नाला सई नदी तक जाता है। एलडीए ने आशियाना कॉलोनी बनाते समय बिजनौर रोड पर शहीद पथ के आगे नाले का निर्माण अधूरा छोड़ दिया। शहीद पथ के नीचे जल निकासी का लेवल भी करीब दो फीट ऊंचा है, जिससे पानी आगे नहीं बढ़ पाता।
सफाई की कमी :
बिजनौर रेलवे क्रॉसिंग के पास रेलवे ट्रैक के नीचे से गुजरने वाले नाले की नियमित सफाई भी नहीं हो पाती है।
अतिक्रमण:
नाले पर कई जगहों पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण पानी का प्रवाह बाधित है।
50 साल पुराने बाढ़ पंपिंग स्टेशन भी बदहाल
बारिश के पानी को गोमती नदी में फेंकने वाले शहर के बाढ़ पंपिंग स्टेशन 50 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। बढ़ती आबादी और नई कॉलोनियों के दबाव के कारण ये अब नाकाफी साबित हो रहे हैं। इन्हें दुरुस्त करने और अधिक क्षमता के नए पंप लगाने के लिए 132 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। यह काम भी सीएंडडीएस इकाई को दिया गया, मगर इसकी लापरवाही के चलते यह काम भी अब तक कागजों से बाहर नहीं आ पाया है।
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किला मोहम्मदी नाला परियोजना में होना है ये काम
आरसीसी ड्रेन का निर्माण :
वीआईपी रोड से इठुरिया पुलिया तक 7.156 किमी मुख्य नाले का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही 3.415 किमी डायवर्टिंग ड्रेन सहित कुल 10.571 किमी क्षेत्र में आधुनिक आरसीसी ड्रेन का निर्माण होना है।
एयरपोर्ट क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण :
चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट क्षेत्र के आसपास नाले की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। नाले के कच्चे हिस्सों को पक्के आरसीसी स्ट्रक्चर में बदला जाएगा, ताकि पानी का बहाव बिना रुके हो सके।
Iयोजना की डीपीआर करीब दो साल पहले बनी थी, मगर वित्तीय स्वीकृति मार्च में मिली है। उसके बाद टेंडर जारी किया गया है। टेंडर प्रकिया पूरी होने के बाद 18 महीने में काम पूरा किया जाना है।I
I- प्रशांत कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, सीएंडडीएस, जल निगमI

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