ब्लू लाइन पर 12 स्टेशन होंगे, जिनमें सात भूमिगत हैं। यह लाइन अमीनाबाद, नाका, कैसरबाग, चौक, ठाकुरगंज जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से गुजर रही है। इस पर करीब 4400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रेड लाइन की तुलना में यहां छोटे स्टेशन बनाने की योजना है। वहीं, चार की जगह तीन कोच की ट्रेन चलेगी।
बाकी प्रोजेक्ट कब शुरू होंगे
लखनऊ में मेट्रो से सीजी सिटी, एसजीपीजीआई, जानकीपुरम, इंदिरानगर से गोमतीनगर लिंक के लिए भी काम होना है। इसके लिए टेक्नो-फिजियबिलिटी रिपोर्ट भी दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन बनाकर दे चुकी है। बसंतकुंज लाइन पर देरी से बाकी पर काम कब शुरू होगा, यह बड़ा सवाल है।
यूपीएमआरसी के एमडी कु मार केशव ने बताया कि लॉकडाउन के बाद पहली बार 31 हजार के ऊपर राइडरशिप पहुंची। लॉकडाउन में जब मेट्रो बंद थी, उस समय औसत राइडरशिप करीब 60 हजार थी। अधिकारियों का दावा है कि देश में सबसे अधिक तेजी से हमारी राइडरशिप बढ़ रही है। दिल्ली मेट्रो 35 प्रतिशत तक ही राइडरशिप वापस पा सकी है। लखनऊ मेट्रो को 50 फीसदी से अधिक राइडरशिप मिल चुकी है।
यूपीएमआरसी के एमडी कुमार केशव का कहना है कि संशोधित डीपीआर प्रदेश सरकार की अनुमति को भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि जल्दी केंद्र की अनुमति के लिए ब्लू लाइन की डीपीआर भेज दी जाएगी। वहां से वित्तीय अनुमति मिलते ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। अनुमति के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा करने में करीब पांच साल लग जाएंगे।