नगर निगम और एलडीए की तरह आवास विकास परिषद के इंजीनियर और अधिकारी भी कमशीनबाजी में पीछे नहीं हैं। यहां पर भी काम की मंजूरी से लेकर भुगतान तक पर कमीशन चलता है।
निर्माण कार्य और ग्र्रुप हाउसिंग पर करीब 12 फीसदी का चढ़ावा परिषद के अधिकारी कर्मचारी ले लेते हैं। वहीं कच्चे काम (मिट्टी) में तो यह करीब 25 फीसदी तक पहुंच जाता है।
हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग में कराए गए निर्माण कार्य का पेमेंट मांगने गए ठेकेदार को कमीशन न देने पर जूनियर इंजीनियर की धमकी देने का मामला भले ही ताजा हो पर आवास विकास परिषद में तो साल भर पहले ही एक ऐसा मामला आया था।
ठेकेदार ने कमीशन की डील को लेकर हुई बातचीत और मांगे गए सामानों की खरीद की रसीद दी तब जाकर आरोपी सहायक अभियंता को सस्पेंड किया गया।
परिषद में काम करने वाले ठेकेदारों की मानें तो फाइल बनते ही कमीशन का खेल शुरू हो जाता है। जिस-जिस टेबल पर फाइल पहुंचती है, वहां-वहां सुविधा शुल्क देना पड़ता है।
यदि इसमें देर हो जाए तो फाइल लटका दी जाती है। कई बार तो कमीशन देने के बाद भी इंजीनियर फाइल लटका देते हैं। साल भर पहले एक ठेकेदार ने मजबूर होकर इसकी शिकायत आवास आयुक्त से की थी।
कमीशन के अलावा भी नित नई फरमाइश होने से परेशान ठेकेदार ने जब ऐतराज किया तो इंजीनियर ने उसके साथ अभद्रता की थी और भुगतान करने से मना कर दिया था।
यह मामला जब आवास आयुक्त के पास गया तब जाकर उसका भुगतान हुआ। करीब साल भर पहले एक इंजीनियर की कमीशनबाजी के पुख्ता सुबूत एक ठेकेदार ने आवास आयुक्त को सौंपे थे।
सुबूत में ठेकेदार ने फोन पर इंजीनियर से बातचीत की सीडी और उसके कार्यालय में आमने-सामने हुई बातचीत की वीडियो सीडी व इंजीनियर द्वारा मंगाए गए एसी और मोबाइल फोन के बिल दिए गए थे।
जांच के बाद आरोपी सहायक अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया था।