लखनऊ। जनेश्वर मिश्र पार्क में चार दिवसीय रेपर्टवा फेस्टिवल के 13वें सीजन की रंगारंग शुरुआत हुई। शास्त्रीय गायन, रंगमंच और सूफी संगीत से सजी पहली शाम को यहां सजे शब्द, माहौल, रंग और ताल सत्रों ने मनोरंजन से भर दिया। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। शहरवासियों को कला, संस्कृति, संगीत, हास्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े देश के प्रख्यात कलाकारों, रचनाकारों और सांस्कृतिक हस्तियों का जमावड़ा देखने को मिलेगा। मंत्री ने आयोजन स्थल का अवलोकन किया। रेपर्टवा के संस्थापक भूपेश राय ने बताया कि साहित्य, व्यंग्य, थियेटर और संगीत क्षेत्र के दिग्गज अलग-अलग सत्र में प्रस्तुति देंगे। किड्स जोन के साथ ही हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगी है। शहरियों ने स्टाॅलों पर लखनवी जायके का लुत्फ उठाया।
‘शब्द’ मंच पर प्रसिद्ध कलाकार चंदुलाल कलबुर्गी ने शास्त्रीय सितार और लोक-फ्यूजन की शानदार प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। फूड एरीना में लखनवी और आधुनिक व्यंजनों का स्वाद लोगों ने लिया। आर्टिजनल बाजार में कारीगरों के हस्तशिल्प आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों के लिए किड्स जोन खास रहा। दिन का समापन देवेशी सहगल की सूफियाना प्रस्तुति से हुआ, जिसने पहले दिन को यादगार बना दिया।
बाॅलीवुड एक्टर प्रतीक गांधी के एकल नाटक ‘’मोहन का मसाला’’ ने दर्शकों को सर्द रात में भी शुरू से आखिर तक बांधे रखा। महात्मा गांधी के शुरुआती जीवन और उनके ‘’मसाले’’ यानी जीवन के अनुभवों, सिद्धांतों पर आधारित इस नाटक में प्रतीक गांधी ने मोहनदास करमचंद गांधी की भूमिका निभाते हुए गांधी के साधारण जीवन से असाधारण बनने की यात्रा को शानदार अंदाज में पेश किया। मनोज शाह के निर्देशन में इस नाटक में गांधी के डरपोक लड़के से महात्मा बनने तक के सफर, पिता की मृत्यु के समय उनका पश्चाताप और कस्तूरबा से मिली सीख के दृश्य पर लोग भावुक हो उठे।
शब्द, माहौल, रंग और ताल से रेपर्टवा फेस्टिवल का आगाज
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