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बोर्ड रिजल्ट जैसा उज्ज्वल नहीं है आधी आबादी का राजनीति में सफर

Thu, 23 May 2019 09:04 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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सांकेतिक तस्वीर
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यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व अन्य बोर्ड रिजल्ट में आधी अबादी की तेजी से तरक्की कर रही है लेकिन राजनीति में ऐसा नहीं है। यहां महिलाओं के भागीदारी की तस्वीर उतनी उज्जवल नहीं है। हलांकि उत्तर प्रदेश से राजनीति को कई बेहतरीन महिला राजनीतिज्ञ मिलीं लेकिन उसी प्रदेश से आजादी के सात दशक बाद भी संसद में आधी आबादी को करीब आधी सीटों से अब तक प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला। 
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कुछ सीटों पर महिलाएं सांसद रह चुकी हैं लेकिन एक या दो बार। सिर्फ प्रतापगढ़, फूलपुर, अंबेडकरनगर व मिर्जापुर ही ऐसी सीटें हैं जहां से अब तक तीन-तीन बार महिलाओं को संसद जाने का मौका मिला।
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वहीं छह सीटों पर अब तक एक-एक बार ही महिलाओं को लोकसभा सदस्य बनने का मौका मिला। इस स्थिति में किसी भी बड़े परिवर्तन की ज्यादा उम्मीद नहीं है। इसका कारण यह है कि अभी जिन सीटों पर चुनाव हुए या होने हैं उनमें से सात सीटों पर प्रमुख दलों ने सिर्फ आठ महिलाओं को ही टिकट दिया है। 

इनमें लालंगज से भाजपा ने नीलम सोनकर को और बसपा ने संगीता आजाद को प्रत्याशी बनाया है। नीलम मौजूदा सांसद हैं। कांग्रेस ने प्रतापगढ़ से सांसद रह चुकीं  रत्ना सिंह को फिर मैदान में उतारा है। इसके अलावा शिवकन्या कुशवाहा को चंदौली, सुप्रिया श्रीनेत को महराजगंज से टिकट दिया है। 

मोहनलालगंज व रायबरेली से सबसे ज्यादा महिला सांसद

कई सीटों पर अब तक जहां एक भी महिला सांसद नहीं चुनी गईं। वहीं मोहनलालगंज और रायबरेली दो ऐसी संसदीय सीटें भी हैं जिनसे आठ-आठ बार महिला सांसद चुनी गई। देश में इतने बार महिला सांसदों को चुनने वाली चुनिंदा संसदीय सीटें ही होंगी। मोहनलालगंज में पहले आम चुनाव से ही लगातार तीन बार गंगादेवी सांसद रहीं। रायबरेली से इंदिरागांधी व शीला कौल सांसद रहीं। अब सोनिया गांधी सांसद हैं। अलीगढ़ से सात बार महिला सांसद चुनी गईं हैं।
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दावों से हकीकत बहुत दूर

महिला आरक्षण के नारे और दावे बहुत पुराने हो गए। सियासी दल जब-तब 33 फीसदी आरक्षण देने की बात करते हैं। भाजपा ने तो संगठन के संविधान में  महिलाओं की 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की व्यवस्था कर रखी है लेकिन टिकट देने में सभी कंजूसी करते दिखते हैं।

इसकी कराण है कि कोई जिताऊ महिला उम्मीदवार न मिलना बता रहा है तो कोई दूसर बहाने बता रहे हैं। इस बार भी लोकसभा की 80 सीटों में भाजपा ने गठबंधन सहित सिर्फ 11 महिलाओं को टिकट दिया है। जबकि पिछली बार गठबंधन सहित 13 महिलाओं को दिया गया था। कांग्रेस ने इस बार 12 और गठबंधन ने 10 महिलाओं को मैदान में उतारा है।
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