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पॉलिटिकल पार्टियों का रेडीमेड बहाना : अगर नहीं मिले वोट तो ईवीएम में जरूर निकाला जाएगा खोट

Thu, 23 May 2019 08:46 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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ईवीएम-वीवीपैट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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23 को पता चलेगा कि जनता ने किस नेता को पसंद किया किसे नहीं। जिसे जनता खारिज करेगी उसके पास हार का ठिकरा फोड़ने के लिए ईवीएम में गड़बड़ी व हैकिंग का रेडीमेड बहाना तो रहेगा ही। 
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इस बहाने का इस्तेमाल नेता पिछले काफी समय से करते आए हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के कुछ सदस्यों ने तो दिल्ली विधानसभा में ईवीएम किस तरह से हैक की जा सकती है इसका डेमो भी दिया था। हलांकि जब उनसे उस मशीन के बारे में पूछा गया तो वह जवाब देने से बचते रहे। 

इससे पहले भी 2014 के लोकसभा चुनाव में हारने के बाद से कई राजनीतिक दलों ने ईवीएम के खिलाफ आवाज उठाई। उसके बाद राज्यों के विधान सभा चुनाव में हर हार के ईवीएम के खिलाफ आवाज और मुखर होती चली गई। फिर 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के बाद ईवीएम अपराधी हो गई।
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बसपा का वूजद खतरे में आ गया तो मायावती ने ईवीएम के खिलाफ हल्ला बोल दिया। सत्ता गवांने के सदमे से परेशान सपा और केंद्र से बेदखल हो चुकी कांग्रेस ने भी बसपा के सुर में सुर मिला दिए। सबने मिलकर ईवीएम के खिलाफ हल्ला बोल दिया। 

हलांकि पंजाब में कांग्रेस की सरकार बन गई तो ईवीएम के खिलाफ हल्ला बोलने वाले राजनीतिक दलों ने चुप्पी साध ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने तो ईवीएम मशीन को चुनौती तक दे डाली, यह कह कर कि उसके इंजीनियर यह साबित कर सकते हैं कि ईवीएम से मनमाफिक पार्टी को वोट दिया जा सकता है। 

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनजीओ ‘न्याय भूमि’ की इन दलीलों को सीरे से खारिजा कर दिया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का दुरुपयोग हो सकता है और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उनका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। जनहित याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा, ‘प्रत्येक प्रणाली और मशीन का उपयोग तथा दुरुपयोग दोनों हो सकता है आशंकाएं सभी जगह होंगी।’

पिछले काफी समय से विपक्षी दलों की ओर से मांग की जा रही है कि सभी चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाए। हालांकि, चुनाव आयोग हर बार इस बात पर जोर देता रहा है कि उनकी मशीन पूरी तरह से सुरक्षित है और उसे किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। 

मध्यप्रदेश के भिंड ज़िले के अटेर में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान तकनीकि गड़बड़ी को विपक्ष ने गंभीर मुद्दा बना लिया। मीडिया में खबर वायरल होने के बाद चुनाव आयोग ने सफाई दी मशीनें ठीक से कैलिब्रेट नहीं हुई थीं, इसलिए ऐसा मामला सामने आया। 

कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने तो यहां तक कहा कि मेरा तो हमेशा से ईवीएम पर भरोसा नहीं रहा है। जब दुनिया भर के देशों में बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं, तो हमारे यहां ईवीएम से चुनाव क्यों हों? 
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भाजपा ने 2009 में विरोध किया

2009 के चुनावी हार के बाद भाजपा ने भी ईवीएम पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी ने भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों, कई गैर सरकारी संगठनों और अपने थिंक टैंक की मदद से ईवीएम मशीन के साथ होने वाली छेड़छाड़ और धोखाधड़ी को लेकर पूरे देश में अभियान चलाया।
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