लखनऊ। खराब जीवनशैली व खान-पान से निसंतानता के मामले बढ़ रहे हैं। इस कारण हार्मोनल असंतुलित होने से महिलाओं में गर्भाशय, अंडाशय, स्तन, योनि और सर्वाइकल कैंसर का खतरा अधिक होता है।
केजीएमयू के स्त्री रोग विभाग क्वीन मेरी की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल और स्त्री कैंसर रोग की विभागाध्यक्ष निशा सिंह बताती हैं कि गर्भधारण न होने से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है। यह गर्भाशय की आंतरिक परत के विकास को बढ़ा देता है। यह हार्मोन लंबे समय तक प्रोजेस्टेरोन के संतुलन के बिना उच्च स्तर पर रहता है तो गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. निशा कहती हैं कि जो महिलाएं गर्भधारण नहीं करती या नहीं चाहतीं, उन्हें मानकर चलना चाहिए कि उनमें कैंसर रोग का खतरा अधिक है।
गर्भाशय कैंसर के बढ़ रहे मामले
पहले गर्भाशय कैंसर को बढ़ती उम्र से जोड़ा जाता था, लेकिन अब 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं भी इससे पीड़ित हैं। क्वीन मेरी में रोजाना निसंतानता से जुड़े 25 से अधिक मामले आते हैं। स्त्री कैंसर रोग विभाग में इस वर्ष गर्भाशय कैंसर के 37 मामले आ चुके हैं। बीते कई वर्षों की तुलना में यह आंकड़ा तीन गुना अधिक है।
नियमित रूप से कराएं जांच
डॉ. निशा सिंह की निसंतानता का सामना कर रहीं महिलाओं को सलाह है कि उन्हें स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित रूप से कैंसर की संभावित जांच और हार्मोनल मूल्यांकन कराना चाहिए। इससे समय रहते कैंसर को पकड़ा जा सके। डॉ. अंजू बताती हैं कि निसंतानता की बड़ी वजह ज्यादा उम्र है। सही उम्र (23-30 वर्ष) में गर्भधारण की योजना बना लेनी चाहिए।