अपने लिए बने सुरक्षा नियमों को समझें महिलाएं
लखनऊ। महिलाओं के साथ हो रहे अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन अब भी बहुत कम ही महिलाएं हैं ऐसी हैं जिन्हें इन अपराधों के लिए बनाए गए नियमों की जानकारी हो। किशोरियां, गृहिणी या वर्किंग विमेन, अधिकतर को महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत मौजूद नियमों व प्रावधानों के बारे में पता ही नहीं है। महिलाओं को उनके सुरक्षा अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए शुक्रवार को कर्तव्यम वेलफेयर सोसाइटी की ओर से ‘जागरूक महिला-सशक्त महिला’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गोमतीनगर स्थित एक निजी कंपनी के दफ्तर में कार्यक्रम का आयोजन कर महिलाओं को आईपीसी की धाराओं के बारे में जानकारी दी गई।
मुख्य वक्ता कर्तव्यम वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक व अधिवक्ता आशुतोष सिंह ने महिला अपराधों के लिए बनी आईपीसी की धारा 354, 354ए, 354बी, 354सी व 354डी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घर हो या कार्यस्थल या किसी अन्य स्थान पर, अगर महिला के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या अपराध होता है तो उसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है, बस जरूरत है महिलाओं को जागरूक होने की।
निर्भया केस के बाद बदले कानूनों की जानकारी नहीं
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी महिलाओं को आईपीसी की अन्य धाराओं के बारे में जानकारी दी। संस्था की सदस्य कंचन व रितु ने कहा कि दिल्ली में हुए चर्चित निर्भया केस के बाद महिला सुरक्षा के कानूनों में सुधार किए गए हैं, जिसकी जानकारी महिलाओं को नहीं है। उन्होंने कहा कि संस्था की ओर से गत 8 माह से कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर महिलाओं को इन कानूनों की जानकारी दी जा रही है।