बदायूं रेप केस से निशाने पर आए पुलिस प्रशासन से महिला हिंसा के सात अन्य मामलों पर जवाब मांगा गया।
बदायूं में दो नाबालिग बहनों के साथ रेप और फिर हत्या के मामले में घिरी यूपी सरकार महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को रोक पाने में बेबस नजर आ रही है।
राज्य महिला आयोग ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के सात मामलों में पुलिस प्रशासन से रिपोर्ट देने को कहा है।
विभिन्न जिलों के ये मामले पिछले दो दिन में मीडिया के जरिये आयोग तक पहुंचे हैं।
सोमवार को राज्य महिला आयोग ने मीडिया की खबरों पर संज्ञान लेते हुए पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की।
आयोग की सदस्य सचिव अनीता सिंह के मुताबिक रविवार और सोमवार को मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित खबरों पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया।
इस बारे में संबंधित अधिकारियों से भी फोन पर वार्ता कर निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को इन मामलों में कार्रवाई के साथ ही महिलाओं के खिलाफ हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने को कहा गया है।
इसके अलावा आयोग को पूरे मामले से तत्काल अवगत कराने के लिए रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए गए।
आयोग ने यह रिपोर्ट सुल्तानपुर में पत्नी और बच्ची को जिंदा जलाने के मामले के अलावा छह अन्य केस में मांगी है।
औरैया में सामूहिक दुष्कर्म के लिए एसएसपी से रिपोर्ट मांगी गई। वहीं, मुरादाबाद के एसएसपी से एक किशोरी से बलात्कार मामले में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
किशोरी से दुष्कर्म का एक मामला गोरखपुर का भी है।
मथुरा के एसएसपी से वहां इंटरव्यू देने गई शिक्षिका के साथ बलात्कार मामले में आयोग ने नाराजगी व्यक्त करते हुए रिपोर्ट मांगी है।
इसके अलावा सूबे में सत्ताधारी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले मैनपुरी और फीरोजाबाद से भी कुछ बड़े मामले हैं।
मैनपुरी में तीन सगी बहनों के लापता होने और फीरोजाबाद में महिला का अपहरण कर गैंगरेप करने के मामले में भी रिपोर्ट मांगी गई है।