सास के अंतिम संस्कार के बाद उनके क्रियाकर्म के लिए वह संशाधन जुटा रही थी कि पति ने भी परलोक सिधार दिया। शायद इस तरह का वाकया किसी के साथ हुआ हो पर गुड़िया के आगे पीछे अब कोई सांत्वना देने वाला भी नहीं है।
चार बच्चों के पालनपोषण की जिम्मेदारी कंधे पर
राजितराम अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। राजितराम की पत्नी गुड़िया से चार संताने हैं। सबसे बड़ी बेटी है। बड़ी बेटी सरस्वती 14 वर्ष की है, जबकि इसके बाद बेटा आकाश दस वर्ष का है। यह अपने पिता के साथ मुंबई गया था। रास्ते में राजितराम की मौत हो गई। दूसरा बेटा विकास पांच वर्ष का तथा तीसरा बेटा प्रकाश मात्र डेढ़ वर्ष का है। गुड़िया की हालत बहुत ही दयनीय है। गरीबी के कारण राजितराम मुंबई में कमाने गया था।