कस्बा निवासी शकीला बानो की बृहस्पतिवार दोपहर अस्पताल ले जाते वक्त एंबुलेंस में मौत के बाद परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया। शकीला को सांस की समस्या थी और परिवारीजन उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे। आक्रोशित परिवारीजनों का आरोप था कि डॉक्टर और एंबुलेंस सहायक की लापरवाही के चलते मौत हुई है। हालांकि, उन्होंने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया।
शकीला के पति सलीम ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर पत्नी की तबियत खराब हो गई थी। उसे सांस लेने में समस्या के चलते कॉल कर एंबुलेंस बुलवाई और शकीला को सीएचसी ले जाया गया। सलीम का आरोप है कि सीएचसी में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते उसकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। सलीम व परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परिवारीजनों का आरोप है जब मरीज को लेकर सीएचसी पहुंचे तो डॉक्टर व उनके स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया जिससे मरीज की हालत और बिगड़ गई। उनका आरोप है कि हालत बिगड़ती देख परिवारीजन ड्यूटी पर तैनात डॉ. मुनीश कुमार के पास गए और मरीज को ऑक्सीजन देने का अनुरोध किया जिस पर वह बिफर गए। उन्होंने कहा, ऑक्सीजन देना मेरा काम नहीं, एंबुलेंस सहायक का है। यह कहते हुए मरीज के परिवारीजनों को चलता कर दिया।
परेशान परिवारीजन एंबुलेंस सहायक के पास पहुंचे तो उसने ऑक्सीजन पाइप फटा होने की बात कहते हुए टरका दिया। उसका कहना था कि पहले 200 रुपये का पाइप लेकर आओ। बीमार महिला के तीमारदार पाइप लेने कस्बे की ओर भागे तो कोई फटे हुए पाइप में टेप लगाने में जुट गया। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। महिला ने दम तोड़ दिया। परिवारीजनों ने हंगामा किया। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से जांच की मांग की है। इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक विवेक कुमार वर्मा ने बताया, परिवारीजनों का आरोप गलत है। महिला काफी समय से सांस की बीमारी से पीड़ित थी। उसे और कई गंभीर बीमारियां थीं। डॉ. मुनीश ने एंबुलेंस में जाकर मरीज को देखा था। परिवारीजन मरीज के साथ कोई पुरानी रिपोर्ट या कागज नहीं लाए थे। परिवारीजनों का आरोप सही था तो शव का पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। (संवाद)