जाली दस्तावेज लगाकर फर्जीवाड़ा करने वाली महिला और उसके सहयोगी को सजा
लखनऊ। फर्जी उत्तराधिकार और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर मकान अपने नाम कराने वाली हरिप्रिया रौतेला और सहयोग करने वाले सहायक लेखाधिकारी नरवीर सिंह को कोर्ट ने दोषी ठहराया है। भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने हरिप्रिया को एक साल छह माह की कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, जबकि नरवीर सिंह को चार साल की कैद व पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने हरिप्रिया के पति नंदन सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
कोर्ट में विशेष अभियोजक ने बताया कि सतर्कता अधिष्ठान की इंस्पेक्टर महिमा सिंह ने गाजीपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक शासन के आदेश पर सतर्कता अधिष्ठान ने कैलाश नाथ सिंह के नाम पर इंदिरानगर में आवंटित मकान को फर्जी कागजातों के आधार पर आरोपी हरिप्रिया रौतेला को अंतरित किए जाने की जांच की गई थी। इसमें पता चला कि हरिप्रिया और उसके पति नंदन ने इंदिरानगर स्थित कैलाश नाथ सिंह के आवंटित मकान को लेने के लिए जिलाधिकारी उन्नाव का फर्जी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और उन्नाव के स्वास्थ्य अधिकारी का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। इसके बाद झूठे रक्त संबंध के आधार पर खुद को कैलाश नाथ सिंह की बेटी दर्शाकर उनके मकान को अपने नाम दर्ज करवा लिया। विवेचना के दौरान पता लगा कि नरवीर सिंह भी साजिश में शामिल थे।