लखनऊ। राज्य सरकार मेट्रो रेल के नार्थ साउथ कॉरिडोर का पहला स्ट्रेच (अमौसी से आलमबाग) अपने खुद के पूरे खर्च पर बनाने की इच्छुक है। इसको लेकर जयपुर में मेट्रो की तेज प्रगति का अध्ययन कर मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल लौट आए हैं।
मुख्य रूप से सरकार के बजट के जरिए किस तरह तेज गति से निर्माण कराते हुए मेट्रो रेल का नौ किलोमीटर दूरी का ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (जेएमआरसी) के प्रबंध निदेशक के अग्रवाल ने लंबी बैठक कर के जयपुर मेट्रो की पूरी कार्य पद्धति को समझा है।
राज्य सरकार को कुल प्रोजेक्ट का 20 फीसदी हिस्सा खुद खर्च करना है। इसका अर्थ है कि, नार्थ साउथ कॉरिडोर पर खर्च होने वाले करीब 6500 रुपये के खर्च में से 1300 करोड़ रुपये राज्य सरकार खुद ही कर सकती है।
जयपुर में भी राजस्थान सरकार ने लगभग 1400 करोड़ रुपये के खुद का हिस्सा खर्च कर के 9 किलीमीटर के पहले खंड पर ट्रायल का आगाज करवा दिया है।
यह काम लगभग तीन साल में पूरा हो गया है। जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अब केंद्र सरकार के हिस्से और विभिन्न एजेंसियों से ऋण के लिए प्रयास कर रही है, ताकि वे कॉरिडोर को आगे बढ़ा सकें।
इस संबंध में राजीव अग्रवाल काफी पहले से कहते चले आए हैं कि राज्य सरकार के खर्च पर ही शुरुआत में काम करवाया जाएगा। इसमें अब पहले स्ट्रेच का काम ही राज्य सरकार बजट से पूरा करने की कोशिश में लग गई हैं।
सबसे पहले मेट्रो अमौसी से आलमबाग के बीच चलाई जानी है। जिसमें करीब 1200 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। राजीव अग्रवाल ने जयपुर में जेएमआरसी के एमडी निहालचंद गोयल से मुलाकात की है।
सूत्रों के मुताबिक, अग्रवाल उस तरीके को जानना चाह रहे थे, जिसमें राज्य सरकार के बजट से ही मेट्रो को चलाया जा सके।