मायावती ने कहा कि सपा सरकार में गुंडाराज से लोग त्रस्त थे। 1995 में सभी दलों ने कहा कि वह सपा से बाहर आ जाएं तो सब समर्थन करेंगे। तब भाजपा व कांग्रेस सहित अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई पर, विचारधारा व मूवमेंट से समझौता नहीं किया।
उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि वे गुमराह न हों। यूपी व मध्य प्रदेश के उपचुनाव के साथ बिहार विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशियों को मतदान करें।
वहीं, अखिलेश यादव ने कहा कि हमारी किसी से भी दुश्मनी नहीं है। 2019 के लोकसभा चुनाव में हमने भाजपा को रोकने के लिए गठबंधन किया था। हमने यहां पर उन्हें (भाजपा) कमजोर किया। अब बसपा ये कह रही है कि हमने उन्हें धोखा दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में 2022 में चुनाव होने हैं लेकिन बसपा व भाजपा, समाजवादी पार्टी को विधान परिषद चुनाव हराना चाहती हैं इसका क्या कारण है मुझे पता नहीं। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। जनता भाजपा से परेशान हो चुकी है। मुझे खुशी है कि अन्य दलों से नए साथी आ रहे हैं और सपा को मजबूत कर रहे हैं। दरअसल, मायावती ने बयान दिया था कि विधान परिषद चुनाव में सपा को हराने के लिए वह भाजपा सहित किसी भी दल का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।