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यूपी के 18 जिलों से होकर बिहार पहुंच रही शराब, हर ट्रक से 12 से 15 लाख का होता है मुनाफा

Tue, 17 Sep 2019 01:44 PM IST
ishwar ashish सैयद यासिर रजा/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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शराब तस्करी में वाराणसी की रामनगर पुलिस की मिलीभगत के बाद सवाल उठने लगा है कि हरियाणा से तस्करी कर लाई जा रही शराब की खेप आखिर कैसे यूपी के 18 जिलों से गुजरकर चंदौली के रास्ते बिहार पहुंच जाती है।

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चंदौली में पकड़े गए तस्करों ने बताया कि पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से यूपी के मुकाबले हरियाणा की 40% सस्ती शराब मेरठ, बरेली, लखनऊ व प्रयागराज जोन होते हुए भारी मात्रा में शराबबंदी वाले प्रदेश बिहार में पहुंचाई जाती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर आबकारी व पुलिस महकमा शराब के अवैध ट्रांसपोर्टेशन और बिक्री पर भले ही सख्ती का दिखावा करता हो, पर हकीकत इसके ठीक उलट है।

हरियाणा की 40 फीसदी सस्ती शराब भारी मात्रा में इन दोनों विभागों की मिलीभगत से पश्चिमी व मध्य यूपी के लगभग 18 जिलों को पार करते हुए प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में स्थित चंदौली जिले तक पहुंच रही है। ये 18 जिले मेरठ जोन, बरेली जोन, लखनऊ जोन और प्रयागराज जोन के हैं। हालांकि इसकी सर्वाधिक खपत बिहार में हो रही है, जहां शराबबंदी लागू है।

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हरियाणा में एक्साइज ड्यूटी है बेहद कम

दरअसल, हरियाणा में शराब पर एक्साइज ड्यूटी बेहद कम है। इसलिए वहां से तस्करी होने वाली शराब और यूपी की एक ही ब्रांड की शराब के दाम में लगभग 40 फीसदी यानी कम से कम दो सौ रुपये प्रति बोतल का अंतर है। इस तरह हरियाणा में शराब यूपी के मुकाबले 40 फीसदी सस्ती है। ऐसे में तस्कर भारी मुनाफा कमा रहे हैं।

पिछले एक सप्ताह में पुलिस व आबकारी विभाग ने चंदौली में भारी मात्रा में शराब पकड़ी तो अलग-अलग जिलों से पुलिस की मिलीभगत से शराब की गाड़ियां पार करने का खुलासा हुआ। बीते महीनों में चंदौली के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में हरियाणा से तस्करी कर लाई जा रही लगभग दो लाख बोतलें शराब पकड़ी जा चुकी है। यह तो वह शराब जो मुखबिर की सूचना पर पकड़ी गई।
इस दौरान कितने ट्रक पार हो गए, अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

हालांकि सूत्रों का कहना है कि गुड वर्क दिखाने के लिए समय-समय पर अलग-अलग जिलों में थोड़ी शराब पकड़ ली जाती है। शराब कारोबारी एसपी सिंह बताते हैं कि एक ट्रक में लगभग पांच सौ पेटी शराब आती जाती है। एक पेटी में 12 बोतलें होती हैं। यानी एक बार में 6,000 बोतलें शराब पार कराने पर 12 से 15 लाख रुपये का मुनाफा होता है। तस्कर पुलिस व आबकारी विभाग पर आधा पैसा खर्च कर आसानी से अपना कारोबार कर रहे हैं।
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हरियाणा के नाम पर खपाई जा रही नकली शराब

एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि यूपी के कुछ जिलों में स्प्रिट से शराब बनाई जाती है, जिसे छोटी-छोटी फैक्टरियों में हरियाणा के नाम पर सील कर बिहार बार्डर पर सप्लाई कर दी जाती है।

उनका कहना है कि इन दिनों यूपी-बिहार बार्डर पर काम के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि ये लोग शराब के कारोबार से एक दिन में दो से ढाई हजार रुपये तक कमा लेते हैं। मामले पर आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव संजय आर भूसरेड्डी का कहना है कि हरियाणा से सप्लाई होने वाली शराब को पकड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। समय-समय पर अभियान चला कर भी कार्रवाई की जाती है।
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