दरअसल, हरियाणा में शराब पर एक्साइज ड्यूटी बेहद कम है। इसलिए वहां से तस्करी होने वाली शराब और यूपी की एक ही ब्रांड की शराब के दाम में लगभग 40 फीसदी यानी कम से कम दो सौ रुपये प्रति बोतल का अंतर है। इस तरह हरियाणा में शराब यूपी के मुकाबले 40 फीसदी सस्ती है। ऐसे में तस्कर भारी मुनाफा कमा रहे हैं।
पिछले एक सप्ताह में पुलिस व आबकारी विभाग ने चंदौली में भारी मात्रा में शराब पकड़ी तो अलग-अलग जिलों से पुलिस की मिलीभगत से शराब की गाड़ियां पार करने का खुलासा हुआ। बीते महीनों में चंदौली के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में हरियाणा से तस्करी कर लाई जा रही लगभग दो लाख बोतलें शराब पकड़ी जा चुकी है। यह तो वह शराब जो मुखबिर की सूचना पर पकड़ी गई।
इस दौरान कितने ट्रक पार हो गए, अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि गुड वर्क दिखाने के लिए समय-समय पर अलग-अलग जिलों में थोड़ी शराब पकड़ ली जाती है। शराब कारोबारी एसपी सिंह बताते हैं कि एक ट्रक में लगभग पांच सौ पेटी शराब आती जाती है। एक पेटी में 12 बोतलें होती हैं। यानी एक बार में 6,000 बोतलें शराब पार कराने पर 12 से 15 लाख रुपये का मुनाफा होता है। तस्कर पुलिस व आबकारी विभाग पर आधा पैसा खर्च कर आसानी से अपना कारोबार कर रहे हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि यूपी के कुछ जिलों में स्प्रिट से शराब बनाई जाती है, जिसे छोटी-छोटी फैक्टरियों में हरियाणा के नाम पर सील कर बिहार बार्डर पर सप्लाई कर दी जाती है।
उनका कहना है कि इन दिनों यूपी-बिहार बार्डर पर काम के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि ये लोग शराब के कारोबार से एक दिन में दो से ढाई हजार रुपये तक कमा लेते हैं। मामले पर आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव संजय आर भूसरेड्डी का कहना है कि हरियाणा से सप्लाई होने वाली शराब को पकड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। समय-समय पर अभियान चला कर भी कार्रवाई की जाती है।