पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बेनी प्रसाद वर्मा ने शनिवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह से मुलाकात की। मुलायम के खिलाफ जमकर शब्द बाण चलाने वाले बेनी लंबे अरसे बाद उनसे मिले और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। यह मुलाकात कई राजनीतिक सवालों को भी जन्म दे गई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगने शुरू हो गए हैं कि बेनी प्रसाद वर्मा की समाजवादी पार्टी में वापसी होने जा रही है।
गौरतलब है कि मुलायम शुक्रवार को ही मेदांता से इलाज कराकर लखनऊ लौटे हैं। बेनी प्रसाद वर्मा से मुलायम की मुलाकात इसलिए भी महत्पवूर्ण मानी जा रही है क्योंकि केंद्र से कांग्रेस सरकार के हटने के बाद बेनी प्रसाद वर्मा राजनीतिक रुप से निष्क्रिय हो चुके हैं। सपा में उनकी वापसी उन्हें उनके इस अज्ञातवास से वापस ला सकती है।
वैसे सपा में उनके लिए वापसी इतनी आसान नहीं है। सपा से अलग होने के बाद मुलायम सिंह यादव पर बेनी प्रसाद वर्मा कई तरह के गंभीर आरोप लगा चुके हैं। एक बयान में बेनी सपा में फिर कभी भी न जाने की बात तक चुके हैं।
जहर उगल चुके हैं मुलायम के खिलाफ
बेनी प्रसाद वर्मा मुलायम सिंह यादव पर कई बार तीखे हमले कर चुके हैं। लोकसभा चुनाव से पहले सपा पर हमला करते हुए बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा था कि समाजवादी पार्टी (सपा) को दो से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी। उन्होंने कहा था कि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव लोकसभा चुनाव में दो से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएंगे। अगर दो से ज्यादा जीत गए तो भगवान की बड़ी मेहरबानी होगी। हालांकि सपा इन चुनावों में पांच सीटें जीतने में सफल रही।
इसके अलावा मुलायम पर तीखा हमला करते हुए वर्मा ने कहा था कि इंडियन मुजाहिदीन को पैदा करने वाले मुलायम सिंह यादव हैं। उन्होंने मुलायम पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
बेनी प्रसाद वर्मा ने मुजफ्फर नगर दंगों के बाद हुई सैफई महोत्सव पर भी मुलायम पर तीखा हमला किया था उन्होंने कहा था कि एक तरफ दंगा राहत शिविरों में भूख और ठंड से जूझते हुए बच्चों की मौतें हो रही हैं, दूसरी तरंफ मुलायम सिंह अपने गांव में सैफई महोत्सव में विदेशी डांसरों से डांस करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम में जरा भी शर्म हो तो उन्हें सैफई महोत्सव को तुरंत बंद कर राहत शिविरों में बच्चों का ध्यान देना चाहिए।
बेनी यहीं पर नहीं रुके। गोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कहा कि मुलायम सिंह न सिर्फ गुंडा है, बल्कि उसके रिश्ते आतंकवादियों से हैं।
मुलायम पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा था कि जितना मैं तुम्हारे बारे में जानता हूं कोई और नहीं जानता। कमिशन खाओ और अपने परिवार को भी खिलाओ, मगर बेनी प्रसाद वर्मा ऐसा नहीं करेगा। मु
इसके बाद बेनी कहा, 'अपराध और बेईमानी तुम्हारा पेशा है। मुलायम सिंह प्रदेश के लिए शाप है।' उन्होंने मायावती का जिक्र करते हुए कहा, 'मायावती लुटेरी थीं, मगर यह (मुलायम) लुटेरा और गुंडा दोनों है।
मुलायम ने भी दिए थे जवाब
ऐसा नहीं है कि मुलायम सिंह यादव ने बेनी प्रसाद वर्मा के बयानों पर चुप्पी साध रखी हो। उन्होंने अपने ऊपर लगने वाले हर आरोप का तीखा जवाब दिया था। बेनी प्रसाद वर्मा पर हमलावर होते हुए उन्होंने कहा था कि जो अपने लड़के की जमानत नहीं बचा पाए वही राहुल को प्रधानमंत्री बना रहे हैं।
एक और बयान में मुलायम सिंह ने कहा कि बेनी वर्मा हमेशा मुसलमानों के विरोधी रहे है। उन्हें मुसलामानों के हितैषी बनने की जरूरत नहीं है। मुसलमान अपना अच्छा और बुरा समझते हैं।
बेनी को चुनौती देते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि बेनी को चुनौती है कि वह अपने संसदीय क्षेत्र गोंडा में लोकसभा चुनाव जीतकर दिखाएं फिर उनकी हर बात का जवाब दिया जाएगा। और बेनी वाकई अपनी सीट हार गए थे।
कभी साथ थे, फिर हुए अलग
बेनी और मुलायम सबसे पुराने समाजवादी नेताओं में से एक थे। माना जाता है कि बेनी को जाने-माने समाजवादी नेता रामसेवक यादव राजनीति में लाए। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर उन्होंने पहली बार 1974 में बारांबकी के दरियाबाद से विधानसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उनकी जीत भी हुई।
बाद में मुलायम सिंह यादव के साथ चौधरी चरण सिंह के संरक्षण में कुर्मी समुदाय से आने वाले बेनी ने अपनी पहचान एक मजबूत और जुझारु नेता के रूप बना ली।
बेनी प्रसाद वर्मा राज्य की राजनीति में तो मुलायम सिंह के साथ रहे ही वह केंद्र की राजनीति में उनके साथ नजर आए। जब संयुक्त मोर्चा सरकार में मुलायम सिंह रक्षा मंत्री बने तो उसी सरकार में बेनी प्रसाद वर्मा संचार मंत्री थे।
बेनी और मुलायम के बीच की दूरी की बड़ी वजह अमर सिंह को माना गया। इनके बीच कटुता 2005 के आसपास ज्यादा बढ़ गई। तब दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक बयान आने शुरू हो गए।
2007 में बेनी सपा से अलग हो गए और समाजवादी क्रांति दल नामक एक पार्टी बनाई। अपनी पार्टी के उम्मीदवार को वह क्या जिता पाते बेनी और उनके बेटे खुद भी चुनाव हार गए। राजनीतिक रुप से खुद को अप्रासंगिकता होने से बचाने के लिए वह कांग्रेस की तरफ मुड़े। 2009 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए।
बेनी को पार्टी से जोड़ने का फैसला खुद राहुल गांधी का था जिनका आकलन था कि यह आदमी यूपी में मरणासन्न कांग्रेस में जान फूंकने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बेनी को गोंडा से टिकट दिया। बेनी जीतकर लोकसभा पहुंच गए. पहले राज्य मंत्री और बाद में केंद्रीय मंत्री बने।