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सोची समझी रणनीति के तहत 21 जून को ही मनाया जाता है योग दिवस

Mon, 19 Jun 2017 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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भले ही 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के तमाम वैज्ञानिक कारण गिनाए जाते हों। कहा जाता हो कि वर्ष का सबसे लंबा दिन होने के नाते इसे योग दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया जिससे व्यक्ति लंबे जीवन के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने को प्रेरित हो।
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पर, 21 जून राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार के लिए कुछ और कारणों से भी खास रहा है। अब योग दिवस के रूप में मान्यता मिलने के कारण संघ के स्वयंसेवकों के लिए इसका महत्व और बढ़ गया है। इस बार तीसरा योग दिवस है।

यूं ही ऐसा हो गया या सोची-समझी रणनीति के तहत हुआ, यह तो पता नहीं, पर इतिहास की एक तारीख और योग दिवस का संयोग इस आयोजन को संघ के लिए न सिर्फ विशिष्ट बनाता है बल्कि सियासत के ‘योग’ की तरफ भी इशारा करता है।
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दरअसल, इस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि भी है। इस नाते संघ परिवार 2015 में इस दिन को योग दिवस के रूप में मान्यता मिलने से पहले भी इसे खास तरीके से मनाता रहा है। केंद्र में भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से विश्व के 175 देशों में 21 जून को योग दिवस के रूप में मान्यता मिलने से संघ परिवार के लिए यह दिन और भी विशिष्ट हो गया है।
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ये हैं भाजपाइयों के तर्क और तथ्य

भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक बंगलूरू में वर्ष 2011 में योग गुरुओं की बैठक का हवाला देते हुए कहते हैं कि उस बैठक में वैज्ञानिक कारणों के आधार पर 21 जून को योग दिवस मनाने का प्रस्ताव किया गया था। कहा गया था कि इस दिन ग्रीष्म संक्रांति होती है।

सूर्य उत्तरी गोलार्ध से दक्षिणी गोलार्ध की तरफ बढ़ना शुरू कर देता है। यह रूपांतरण के लिए बेहतर समय होता है। इसीलिए इसे योग दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया। पर, पूरी स्थिति पर नजर डालें तो हेडगेवार की पुण्यतिथि तथा योग दिवस के संयोग के कुछ और भी ‘योग’ दिखाई पड़ते हैं।

संघ हमेशा से यह तर्क देता चला आया है कि डॉ. हेडगेवार ने तन, मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि तथा उन्नयन के लिए शाखाओं की शुरुआत की थी। शाखाओं में शारीरिक व्यायाम की क्रियाओं में योग के कई आसन शामिल हैं।

सूर्य नमस्कार तो शाखाओं पर आने वाले स्वयंसेवकों के व्यायाम का अहम हिस्सा है। संयोग ही सही, लेकिन लगता है कि स्वयंसेवक से सियासत में आए और सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हेडगेवार की पुण्यतिथि और योग दिवस के संयोग को ‘योग’ बनाकर इस दिन को खास बनाने कोशिश की है।
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