भले ही 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के तमाम वैज्ञानिक कारण गिनाए जाते हों। कहा जाता हो कि वर्ष का सबसे लंबा दिन होने के नाते इसे योग दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया जिससे व्यक्ति लंबे जीवन के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने को प्रेरित हो।
पर, 21 जून राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार के लिए कुछ और कारणों से भी खास रहा है। अब योग दिवस के रूप में मान्यता मिलने के कारण संघ के स्वयंसेवकों के लिए इसका महत्व और बढ़ गया है। इस बार तीसरा योग दिवस है।
यूं ही ऐसा हो गया या सोची-समझी रणनीति के तहत हुआ, यह तो पता नहीं, पर इतिहास की एक तारीख और योग दिवस का संयोग इस आयोजन को संघ के लिए न सिर्फ विशिष्ट बनाता है बल्कि सियासत के ‘योग’ की तरफ भी इशारा करता है।
दरअसल, इस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि भी है। इस नाते संघ परिवार 2015 में इस दिन को योग दिवस के रूप में मान्यता मिलने से पहले भी इसे खास तरीके से मनाता रहा है। केंद्र में भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से विश्व के 175 देशों में 21 जून को योग दिवस के रूप में मान्यता मिलने से संघ परिवार के लिए यह दिन और भी विशिष्ट हो गया है।