इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीबीआई के सभी केसों में बहस के लिए सिर्फ एक ही अधिवक्ता (एएसजी) को अधिकृत करने पर सख्त रुख अख्तियार किया है। इस मामले में कोर्ट ने सीबीआई के लखनऊ जोन के उप विधिक सलाहकार से हलफनामे पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि दो हफ्ते में निजी शपथपत्र पेश कर बताएं कि सारे मुकदमों में बहस के लिए सिर्फ एक ही वकील को क्यों तैनात किया है? मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने यह आदेश जवाहरलाल की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दिया। इस मामले में सीबीआई पक्षकार है। सुनवाई के समय केंद्र सरकार के वकील काजिम इब्राहीम ने बताया कि सीबीआई की तरफ से पेश होने वाले सहायक सालिसिटर जनरल (एएसजी) एसबी पांडेय अस्वस्थ हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर किसी वजह से एएसजी उपलब्ध न हों तो क्या सीबीआई का कोई और पैनल (अधिकृत अधिवक्ता) है या नहीं।
जवाब में इब्राहीम ने कहा कि सिर्फ एएसजी ही सीबीआई वाले मामलों में बहस को अधिकृत हैं। इसपर कोर्ट ने कहा कि यह काफी आश्चर्यजनक है कि सीबीआई ने मामले में बहस को सिर्फ एक अधिवक्ता रखा है। एएसजी को सहयोग (असिस्ट) करने के लिए कोई और नहीं है।