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आखिर क्यों 91 साल की उम्र में एनडी ने ओढ़ा भगवा चोला

Thu, 19 Jan 2017 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अमित शाह के सा‌थ एनडी तिवारी व उनकी पत्नी - फोटो : AmarUjala
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लगभग 66 बरस पहले समाजवाद की बुनियाद पर सियासी सफर शुरू करने वाले खांटी कांग्रेसी नेता नारायण दत्त तिवारी ने समाजवादी व कांग्रेस का दामन छोड़कर भगवा चोला ओढ़ लिया। इसकी वजह भी सियासी है।
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यह अपने बायोलॉजिकल बेटे रोहित शेखर को वारिस के तौर पर स्थापित करने की महत्वाकांक्षा ही है कि 91 साल के एनडी बुधवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चौखट पर दस्तक देने को मजबूर हुए।

उन्होंने उस भगवा चोला और विचारधारा को अपनाया जिसकी वह जिंदगी भर मुखालफत करते रहे। उनके इस कदम से उनके पुत्र का राजनीतिक भविष्य कहां तक बन पाता है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन यह तो साबित हो गया कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है।
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एनडी तिवारी उन चुनिंदा नेताओं में हैं जिन्हें सियासत का महारथी माना जाता है। एक दौर था कांग्रेस के ताकतवर नेता के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी अलग पहचान थी।

'बेटे की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश में लगे'

यह बात दीगर है कि उनके साथ विवाद भी जुड़े रहे। सेक्स स्कैंडल में नाम आने पर 2009 में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल पद से हटाए जाने के बाद से वह राजनीति में बहुत सक्रिय नहीं हैं। 2014 में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्होंने उज्जवला शर्मा को पत्नी और रोहित शेखर को बेटे के रूप अपनाया।

अब बेटे की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कभी सोनिया-राहुल तो कभी मुलायम सिंह यादव-अखिलेश यादव की चौखट पर दस्तक देते रहते हैं।

मुलायम-अखिलेश ने उनका सम्मान रखते हुए रोहित को राज्यमंत्री का दर्जा देकर राजनीतिक क्षमता साबित करने का मौका भी दिया हालांकि रोहित इसमें विफल रहे। अब रोहित व उनकी मां ने एनडी को भगवा चोला भी पहनवा दिया है।

दो राज्यों के रहे सीएम
दो राज्यों के मुख्यमंत्री रहने का भी उनके रिकॉर्ड है। एनडी तीन बार यूपी तथा एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसके साथ केंद्र में विदेश सहित कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 22 अगस्त 2007 से 26 दिसंबर तक वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे।

आजादी की लड़ाई में भी योगदान

आजादी की लड़ाई में भी उन्होंने अपने पिता के साथ योगदान दिया था। उनकी शुरुआती पढ़ाई हल्द्वानी, बरेली और नैनीताल में हुई। पिता पूर्णानंद तिवारी सरकारी सेवा में थे।

उनके तबादले की वजह से उन्होंने एक से दूसरे शहर में रहते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की। 1942 में ब्रिटिश सरकार की साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ नारे वाले पोस्टर और पम्फलेट छापने पर उन्हें नैनीताल जेल में डाल दिया गया। जहां उनके पिता पूर्णानंद तिवारी पहले से ही बंद थे।

पहली बार सोशलिस्ट पार्टी से बने विधायक, 1963 में कांग्रेस से जुड़े
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए व एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1947 में आजादी के साल ही वह इस विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए। 1950 में उत्तर प्रदेश के गठन और 1951-52 में प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में एनडी ने नैनीताल (उत्तर) सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता।

कांग्रेस के साथ तिवारी का सियासी सफर 1963 से शुरू हुआ। 1965 में वह कांग्रेस के टिकट पर काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और पहली बार मंत्रिमंडल में उन्हें जगह मिली।

1976 में पहली बार बने यूपी के सीएम

- फोटो : Amar Ujala
नारायण दत्त तिवारी ने कांग्रेस में संगठन का कामकाज भी संभाला। 1969 से 1971 तक वह युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। जनवरी 1976 में वह पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने।

लेकिन जेपी आंदोलन की वजह से 30 अप्रैल 1977 को ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद अगस्त 1984 से सितंबर 1985 तथा जून 1988 से दिसंबर 1989 तक दो बार वह फिर यूपी के सीएम बने।

विवादों से रहा नाता
1990 के दशक में एक दौर ऐसा भी आया जब राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी दावेदारी की चर्चा भी हुई। 1995 में उन्होंने अर्जुन सिंह के साथ मिलकर नई पार्टी बनाई लेकिन थोड़े समय बाद ही वह फिर कांग्रेस में लौट आए।
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सेक्स सीडी में नाम आने पर राज्यपाल पद छोड़ा

एनडी तिवारी 2007 से 2009 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे। यहां उनका कार्यकाल बेहद विवादास्पद रहा। सेक्स स्कैंडल से जुड़ी एक विवादित सीडी में कथित रूप से दिखने के बाद उन्हें राज्यपाल पद छोड़ना पड़ा।

पितृत्व विवाद से भी हुई फजीहत
पितृत्व विवाद को लेकर भी एनडी की काफी फजीहत हुई। रोहित शर्मा ने दावा किया कि एनडी तिवारी उनके बायोलॉजिकल पिता हैं। रोहित और उसकी मां उज्ज्वला शर्मा ने 2008 में अदालत में एनडी के खिलाफ केस दाखिल किया।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद एनडी को न सिर्फ रोहित को बेटा मानना पड़ा बल्कि मई 2014 में उज्ज्वला शर्मा से दूसरा विवाह भी करना पड़ा।
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