सभी को याद होगा कि भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की मायावती पर टिप्पणी के विरोध में मैदान में उतरे बसपा के तत्कालीन नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी सहित बसपा के अन्य नेताओं ने सिंह के परिवार के लोगों पर कई अशोभनीय टिप्पणियां कर दी थीं। इसे भाजपा ने मुद्दा बना लिया था।
इस आंदोलन ने भाजपा को बसपा के खिलाफ माहौल बनाने में काफी मदद की थी। शायद इसी वजह से मायावती ने जयप्रकाश पर कार्रवाई कर विवाद खड़ा होने से बचाने की कोशिश की है। अतीत पर नजर डालें तो बसपा सुप्रीमो को किसी नेता का ज्यादा प्रचार-प्रसार करके अपनी ब्रांडिंग करना पसंद नहीं है।
जयप्रकाश और वीर सिंह के समर्थन में बड़े पैमाने पर होर्डिंग व कटआउट लगवाए गए थे। जयप्रकाश पर कार्रवाई का एक कारण यह भी बना। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में मायावती की कांग्रेस से समझौते की बातचीत भी चल रही है। इसलिए भी उन्होंने जयप्रकाश पर आनन-फानन में कार्रवाई कर दी।
जयप्रकाश सिंह दलित समाज में जाटव जाति के है। जिस जाति की मायावती हैं। वे गौतमबुद्ध नगर के दादरी इलाके के रहने वाले हैं। जेपी 2009 से पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में बसपा में काम कर रहे हैं। मायावती के भाई आनंद के विश्वासपात्र जयप्रकाश 26 मई को उस वक्त चर्चा में आए जब उन्हें पार्टी में सबसे अहम पद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।
बताया जाता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मंच से भाषणों में खुद को जय और साथी नेता वीर सिंह को वीरू बताकर गब्बर सिंह (मोदी) का सफाया करने का दावा करने वाले जयप्रकाश ने कल भी यह बात कही थी। पर, उन्हीं को पद से हटा दिया गया।
उनकी मंगलवार को वाराणसी में बैठक होनी थी। पर, इस बैठक में वह जाकर और कुछ कहते उससे पहले ही मायावती ने उन्हें चलता कर दिया।