जैन ने लिखा कि एक अन्य रिट में तत्कालीन सचिव, वन ने शपथ पत्र दिया था, जिसमें एफएसओ द्वारा वन बंदोबस्त प्रक्रिया में प्राप्त अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए वन अधिनियम की धारा-4 की भूमि के बड़े क्षेत्रफल को वन क्षेत्र से बाहर करने की कार्यवाही को अनुमोदित करने की प्रार्थना की गई थी। आशंका है कि तत्कालीन सचिव वन के निर्देशों पर ही इस पिटीशन को वापस लिया गया।