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समाजवादी पार्टी का असली किंग कौन, अब चुनाव आयोग करेगा फैसला

Mon, 02 Jan 2017 11:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : getty images
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सपा के दो फाड़ होने के बाद अब चुनाव आयोग फैसला करेगा कि असली सपा कौन सी है? मुलायम सिंह यादव की या अखिलेश यादव की। आयोग का फैसला जिसके पक्ष में आएगा, 2017 के चुनाव में वही साइकिल चलाएगा। अगर, विधानसभा चुनाव तक इस विवाद का हल न निकला तो साइकिल सिम्बल सीज हो जाएगा। ऐसे में सपा के दोनों खेमों को 109 फ्री सिम्बल से किसी पर चुनाव लड़ना पड़ेगा।
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दरअसल, सपा में अब दो अध्यक्ष हो गए हैं। मुलायम और अखिलेश। दोनों ही खुद को असली सपा बता रहे हैं। जिस सम्मेलन में अखिलेश अध्यक्ष चुने गए, मुलायम उसे असंवैधानिक बता रहे हैं। वे इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र भेज चुके हैं। इसके विपरीत रामगोपाल का दावा है कि पूरी पार्टी अखिलेश के साथ है। इसकी सूचना जल्द ही चुनाव आयोग को भेज दी जाएगी। कानूनी जानकार मानते हैं कि किसी दल में विभाजन होने या अध्यक्ष पद पर विवाद होने पर निर्वाचन आयोग तय करता है कि असली पार्टी या अध्यक्ष कौन है? 

अभी तो मुलायम अध्यक्ष, पिटीशन दायर हुआ तो जारी होगा नोटिस
राज्यपाल के सलाहकार रहे पूर्व जिला जज चन्द्रभूषण पांडेय का कहना है कि चुनाव आयोग में दाखिल पदाधिकारियों की सूची के मुताबिक तो मुलायम ही अभी सपा के अध्यक्ष हैं। अगर आयोग में पिटीशन दायर किया जाता है कि राष्ट्रीय सम्मेलन में अखिलेश को अध्यक्ष चुन लिया गया है तो आयोग मुलायम को नोटिस जारी करेगा।
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'सपा के संविधान में अध्यक्ष को ज्यादा अधिकार'

फाइल फोटो
​पिटीशन करने वालों को साबित करना होगा कि राष्ट्रीय सम्मेलन पार्टी के संविधान के अनुसार हुआ है। वे कहते हैं कि सपा के संविधान में अध्यक्ष को ज्यादा अधिकार हैं। इसमें प्रावधान है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी या राष्ट्रीय अधिवेशन के 40 फीसदी प्रतिनिधियों की मांग पर राष्ट्रीय अध्यक्ष विशेष अधिवेशन बुला सकते हैं।

सम्मेलन मुलायम ने नहीं बुलाया था। यह रामगोपाल यादव ने बुलाया था। उन्हें साबित करना होगा कि राष्ट्रीय सम्मेलन संविधान के अनुसार बुलाया गया था। अगर वे इसे साबित करने में सफल रहे तो अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष माना जाएगा। सिम्बल बांटने का अधिकार भी उन्हीं के पास रहेगा।

सियासी दलों में पहले भी हुए विवाद
उत्तराखंड क्रांति दल के दो फाड़ होने पर चुनाव आयोग ने उनका सिम्बल सीज कर दिया था। दोनों धड़ों से 48 घंटे के भीतर नए सिम्बल का आवेदन मांगा था। कई और राज्यों में ऐसे विवादों में आयोग के फैसले आए हैं।
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