लखनऊ। जिला प्रशासन की सख्ती के बाद खोदाई के दौरान भूमिगत केबल कटने की घटनाएं तो थम गईं, लेकिन पुलिस की लापरवाही अब भी बरकरार है। मई में केबल कटने की घटनाओं पर बिजली विभाग की तहरीरों के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इससे न तो ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो पा रही है, न ही क्षतिपूर्ति मिल पा रही है।
चौक खंड के एक्सईएन रमन और बीकेटी के एक्सईएन पंकज गुप्ता ने बताया कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, ठेकेदारों की कार्यप्रणाली में सुधार आना मुश्किल है। पुलिस की ढिलाई से ठेकेदार अब तक न तो जुर्माना भर रहे हैं और न ही नुकसान की भरपाई कर रहे हैं।
चौक के नादान महल रोड पर जल निगम की लापरवाही से केबल कटी थी, जिसकी ₹78,403 की क्षतिपूर्ति का एस्टीमेट भेजा गया, पर अब तक भुगतान नहीं हुआ। राजभवन खंड के अर्जुनगंज समेत कई स्थानों पर क्षतिपूर्ति अब भी लंबित है।
बिजली विभाग के अपने ठेकेदार भी केबल काटने के दोषी हैं। अलीगंज के गोयल चौराहा और कुर्सी रोड पर विभागीय ठेकेदारों ने भूमिगत लाइन काटी, लेकिन एफआईआर तो दूर, कोई जुर्माना भी नहीं वसूला गया।
हालांकि, अमीनाबाद में मई में दो बार केबल कटने पर ₹1,21,526 की क्षतिपूर्ति बिजली विभाग को मिल गई। मगर एफआईआर वहां भी दर्ज नहीं हुई—तहरीर पर सिर्फ रिसीविंग देकर लौटा दी गई।
जल निगम का ठेकेदार नगर निगम से अनुमति लेकर खोदाई कर रहा था, जिसके कारण भूमिगत केबल कटने के कारण जई-एसडीओ की तहरीर पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
- ब्रजेश सिंह, इंस्पेक्टर बाजारखाला कोतवाली