1947 में देश को आजादी मिलने के बाद हर सरकारी इमारत पर झंडा फहराया जाने लगा। हालांकि, लविवि में इससे 10 साल पहले ही तिरंगा फहरा दिया गया था। इसका श्रेय जाता है लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे जय नारायण श्रीवास्तव को। उन्होंने जान हथेली पर रखकर कला प्रांगण में जाकर अंग्रेजों का झंडा बदल दिया था।
लविवि का छात्रसंघ स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान के लिए भी जाना जाता है। इसके कई पदाधिकारियों ने आंदोलन करने पर जेल की हवा भी खाई। स्वर्गीय जय नारायण श्रीवास्तव के पुत्र धर्मेंद्र नारायण (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में एडीजी) ने बताया कि उन्होंने बाबूजी से पूरी कहानी सुनी है। वे बताते थे कि वर्ष 1937 में लविवि के एक कार्यक्रम में गवर्नर जनरल सर हेटली तथा मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत को शामिल होना था।
स्वतंत्रता आंदोलन का दौर था, इसलिए कई दिन पहले से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। बाबूजी ने साथियों के साथ तय किया कि भवन पर तिरंगा ही फहराया जाएगा। इसके लिए वे एक दिन पहले ही चोरी-छिपे कला प्रांगण की छत पर जाकर बैठ गए।
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जब गवर्नर जनरल और सीएम के आने का समय हुआ, उससे पहले उन्होंने ब्रिटिश झंडे को तिरंगे से बदल दिया। इसके बाद जब झंडा फहराया गया तो तिरंगा देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गये। लोेगों को पता चल गया कि इसके पीछे उन्हीं का हाथ था, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं था।