देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू
यह तो सभी को पता है कि जवाहर लाल नेहरू की महात्मा गांधी से पहली मुलाकात लखनऊ में हुई थी। मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र का प्रस्ताव भी लखनऊ में पारित हुआ था। पर, यह बात कम ही लोगों को पता होगी कि 1921 में आजादी के आंदोलन के दौरान लखनऊ में ही पिता-पुत्र के रूप में दो बड़े नेता यहीं जेल में बंद भी रहे।
ये पिता-पुत्र कोई और नहीं भारतीय राजनीति के दो बड़े नाम मोतीलाल नेहरू और उनके पुत्र जवाहर लाल नेहरू। सभी को पता है कि जवाहर लाल नेहरू का परिवार काफी संपन्न था। वह सुविधाओं के बीच पले और बढ़े थे।
कहा यह भी जाता है कि जवाहर लाल नेहरू पेरिस के धुले कपड़े पहनते थे। घर में नौकर-चाकरों की भी लंबी फौज थी। ‘मेरी कहानी’ पुस्तक से पता चलता है, ‘मोतीलाल नेहरू को कसरत का बड़ा शौक था। इस वजह से उनके कपड़े रोज ही पसीना से तर हो जाते थे। न धुलने पर बदबू आती थी। न धुले जाने पर वह बदबू करने लगते थे।
जवाहर लाल नेहरू उनके कपड़े धुला करते थे। जेल में राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, महादेव देसाई, देवदास गांधी, जॉर्ज जोसेफ भी बंद थे। उन दिनों जेल में कुआं ही हुआ करता था। उसी से पानी खींचकर काम करना पड़ता था। एक दिन जॉर्ज जोसेफ ने देखा कि नेहरूजी कुआं से पानी खींच रहे हैं। कुआं के पास रखे पत्थर पर कपड़े पड़े हैं।
जोसेफ ने नेहरू से पूछा, ‘बहुत ज्यादा कपड़े हैं?’ नेहरू ने जवाब दिया, ‘पिताजी के भी हैं।’ जोसेफ ने कहा, ‘अरे! मैं किसी को बुला देता हूं।’ नेहरू ने कहा, ‘मैं उनका पुत्र हूं। दूसरे से कपड़े क्यों धुलवाऊं।’ यही नहीं, वह अपने बैरक और सायबान की भी अपने हाथों सफाई किया करते थे। लखनऊ जेल में बंदी के दौरान वह जेल में बंद अनपढ़ लोगों को पढ़ाया करते थे।