लोहिया ने कहा कि उनकी प्रधानमंत्री के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है, लेकिन उनकी देखादेखी देश के 50 लाख लोग वैसी ही जीवन शैली अपना रहे हैं। 15 हजार करोड़ रुपये की सकल राष्ट्रीय आय का पांच हजार करोड़ वहां खर्च हो रहा है, बाकी 43.5 करोड़ नागरिक बचे हुए 10 हजार करोड़ में जीवन यापन कर रहे हैं। लोहिया ने इस विषमता को देश के विकट हालात की वजह बताया।