बता दें कि 1980 के चुनाव में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी आंध्र प्रदेश की मेडक और यूपी की रायबरेली सीट से चुनाव लड़ी थीं। बाद में उन्होंने रायबरेली से इस्तीफा देकर यहां से अपने भतीजे अरुण नेहरू को चुनाव लड़ाया। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव सरकार में अरुण आंतरिक सुरक्षा मंत्री बने।
बोफोर्स घोटाला का मामला तूल पकड़ने पर अरुण और राजीव के संबंध खराब हो गए। अरुण वीपी सिंह के साथ चले गए और 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सतीश शर्मा के खिलाफ रायबरेली से मैदान में उतरे तब प्रियंका ने अरुण के खिलाफ चुनाव प्रचार करते हुए कहा था कि एक ऐसा व्यक्ति जिसने मेरे पिता के मंत्रिमंडल में रहते हुए गद्दारी की थी जिसने अपने भाई की पीठ में छुरा भोंका। इसका असर यह हुआ कि अरुण नेहरू चुनाव हार गए। बाद में सतीश शर्मा ने सोनिया गांधी के लिए यह सीट खाली कर दी।
वर्षों बाद नेहरू और गांधी परिवार 2013 में एक साथ आए जब अरुण गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती थे। राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा उन्हें देखने के लिए अस्पताल गए। अरुण के निधन पर उन्हें मुखाग्नि प्रियंका के बेटे रेहान ने दी थी अब प्रियंका बड़े उत्साह के साथ अवंतिका का परिचय करा रही है।