आखिर स्मार्ट सिटी है क्या, इस सवाल पर जवाब अलग-अलग हो सकते हैं। आवास विकास परिषद के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भी विशेषज्ञों के बीच यह सवाल रहा। स्मार्ट सिटी को परिभाषित करने की कोशिशें हुईं।
एक सर्वमान्य चीज जो निकलकर जो सामने आई उसके मुताबिक जहां प्रदूषण कम हो, साफ-सफाई और सेहत का खयाल हो, लोगों की सामान्य दिनचर्या के विभिन्न पहलुओं का बखूबी ध्यान रखा जाए, उसे ही स्मार्ट सिटी कहा जाना चाहिए।
गोमतीनगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘डवलपमेंट ऑफ टाउनशिप’ थीम पर दो दिवसीय सेमिनार में आवास एवं विकास परिषद ने यही कुछ सीखा। विशेषज्ञों ने जो खास बातें बताईं, उन्हें लागू करने का परिषद ने संकल्प जताया। कहा गया कि इसको लेकर प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा जा रहा है।
कमिश्नर मो. शाहबुद्दीन ने विशेषज्ञों की सलाहों को सराहा और कहा कि सरकार से हरी झंडी लेकर ऐसी हरसंभव व्यवस्थाओं को परिषद अपनी कॉलोनियों में लागू करेगी। इस मौके पर विशेषज्ञों के साथ ही महीप सिंह थापर, आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर काजमी अबसार ने भी विचार व्यक्त किए।
सेमिनार में अपर आवास आयुक्त और सचिव रुद्र प्रताप सिंह, चीफ इंजीनियर आरके अग्रवाल, विशेष कार्याधिकारी एमपी वैश्य, निदेशक-एमडीसी विनीत सिंघल, एसई प्रवेंद्र कुमार व एसई अरुण कुमार भी मौजूद रहे। शनिवार शाम सेमिनार का समापन हो गया।