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10 दिनों में 60 फैक्ट्रियां व हथियारों का भारी जखीरा बरामद

Sun, 15 Jan 2017 01:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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यूपी में चुनाव आचार संहिता लागू हुए दस दिन ही हुए हैं और अब तक दो हजार के करीब अवैध असलहे पकड़े जा चुके हैं। इसमें मुंगेर में बने असलहों से लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बनने वाली कंट्री मेड पिस्टल तक शामिल है।
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मजेदार बात यह कि जितने असलहे एक दिन में पकड़े जा रहे हैं उतने पिछले पूरे साल में नहीं पकड़े गए। इसी शुक्रवार को प्रदेश भर में 413 अवैध असलहे बरामद हुए जबकि पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक अवैध शस्त्र पकड़े जाने या बरामद होने की संख्या 403 थी।

हालांकि, कुछ वरिष्ठ अधिकारी इसके पीछे की वजह कुछ और बताते हैं। अपराधी असलहों का इस्तेमाल चुनाव के लिए करते हैं।

चुनाव से ठीक पहले अवैध असलहों की डिमांड बढ़ जाती है, कुटीर उद्योग के रूप में यह धंधा पनपने लगता है। असलहों का खास इस्तेमाल वोटर को डराने धमकाने और साइलेंट बूथ कैप्चरिंग के लिए किया जाता है।
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कभी मुंगेर था बदनाम, अब हर शहर में है फैक्ट्री

देशी तमंचे के लिए कभी बिहार का मुंगेर बदनाम हुआ करता था। एसटीएफ के एक अधिकारी की मानें तो मुंगेर से असलहों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में दिक्कत आती थी। इसलिए वहां के कारीगर दूसरे शहर में जाकर लोगों को ट्रेंड करने लगे।

यही वजह है कि प्रदेश के दूसरे जिलों में भी असलहों की फैक्ट्रियां पकड़ी जा रही हैं। पिछले 10 दिनों में असलहों की 60 अवैध फैक्ट्रियां और 1954 अवैध शस्त्र पकड़े जा चुके हैं।

वोटर को प्रभावित करना है मकसद
रिटायर पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह कहते हैं कि जब से माफिया और बदमाश चुनावी मैदान में उतरने लगे हैं, तब से चुनाव से ठीक पहले असलहों की डिमांड कई गुना बढ़ जाती है।

माफिया चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडे का प्रयोग करते हैं। असलहों का इस्तेमाल लोगों को डराने व धमकाने के लिए होता है।

सामानों की बिक्री पर पुलिस रखती है निगाह

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चुनाव के समय असलहे बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान की बिक्री बढ़ जाती है। पुलिस के लिए फैक्ट्रियां पकड़ने का यही सबसे बड़ा सूत्र होता है।

एटलस साइकिल की नाल और .22 बोर की एयर गन की नाल .12 बोर के तमंचे के लिए सबसे कारगर साबित होती है। यही कारण है कि साइकिल की चोरियां भी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा गंधक, पोटाश और बारूद की खपत भी बढ़ जाती है।

पश्चिमी यूपी में फल-फूल रहा कारोबार
अवैध असलहे बनाने का धंधा इन दिनों पश्चिमी यूपी में उफान पर है। सर्वाधिक असलहे यहीं से मिल रहे हैं। शामली, गाजियाबाद, बिजनौर या बरेली इन सभी जिलों में रिकॉर्ड अवैध असलहे और फैक्ट्रियां पकड़ी जा रही हैं।

शुक्रवार को अकेले शामली में 200 से अधिक अवैध असलहे और फैक्ट्रियां पकड़ी गईं। वहीं गाजियाबाद में बड़े पैमाने पर देशी बम मिले।
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इसी माध्यम से होती है साइलेंट बूथ कैप्चरिंग

- फोटो : demo pic
रिटायर्ड डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि माफिया और बदमाश चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडे अपनाते हैं। असलहों के दम पर वोटरों को धमकाने और डराने के लिए छोटी मोटी घटनाएं भी करते हैं। साइलेंट बूथ कैप्चरिंग इसी माध्यम से होती है।

आईजी क्राइम भगवान स्वरूप का कहना है कि चुनाव के दौरान विशेष अभियान चलाया जाता है। इस बार विशेष अभियान चलाकर अवैध शस्त्रों को पकड़ने पर खास जोर दिया जा रहा है। पुलिस की सक्रियता पहले भी रहती है लेकिन चुनाव के समय इन हथियारों की डिमांड बढ़ती है। पुलिस की सक्रियता से इन्हें पकड़ा जाता है।

इन जिलों में दस दिन में सबसे अधिक असलहे बरामद
शामली-234
गाजियाबाद-94
मुरादाबाद-75
बिजनौर-68

संभल-61
बरेली-56
बहराइच-52
शाहजहांपुर-50
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