लोग जिन असलहों को आत्मरक्षा के लिए ले रहे हैं, उनसे ही हत्याएं अधिक हो रही हैं। यही नहीं, असलहों के लाइसेंस जमकर बांटे गए।
स्थिति यह है कि लोगों के पास सशस्त्र पुलिस से कई गुना लाइसेंसी असलहे हैं। यह एक बड़े खतरे का सबब बन सकता है। चौंकाने वाला यह खुलासा आईआईएम लखनऊ की स्टडी रिपोर्ट में सामने आया है।
राज्य सरकार ने यह स्टडी हर्ष फायरिंग की बढ़ती वारदातों में हो रही मौतों को लेकर कराई थी। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में यह रिपोर्ट प्रमुख सचिव गृह के हलफनामे के साथ पेश की थी।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सरकार से इस रिपोर्ट पर 18 सितंबर तक अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने शनिवार को यह आदेश एक लंबित याचिका पर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के आग्रह पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी की खेल प्रतियोगिताओं में शामिल होने वाले खिलाड़ियों के शस्त्रों के लाइसेंस नियमानुसार जारी करने की इजाजत दे दी है।
अभी तक कोर्ट के पहले के आदेशों के तहत आमतौर पर शस्त्र लाइसेंस बनाए जाने पर रोक है।
असलहे बने हैसियत का प्रतीक
शासकीय अधिवक्ता रिशाद मुर्तजा के अनुसार आईआईएम लखनऊ की स्टडी में यह तथ्य भी आया कि समाज में अपनही अहम व खास हैसियत दिखाने के लिए लोग लाइसेंसी असलहों में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आभूषण की तरह असलहे भी हैसियत का प्रतीक बन गए हैं।