निमोनिया पीड़ित बच्चों में हाइपोक्सिमिया (ऑक्सीजन का स्तर 90 से नीचे जाना) जानलेवा साबित हो सकता है। केजीएमयू ने अपने साझा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में बगैर ऑक्सीमीटर हाइपोक्सिमिया का पता लगाने के लिए खास मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल में लक्षण आधारित अंकों का जोड़ पांच से ज्यादा होने का मतलब है कि बच्चे की हालत गंभीर है और उसे अस्पताल ले जाने की जरूरत है।
(नोट : कुल जोखिम अंक पांच या ज्यादा होना खतरे का संकेत है।)
केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका गुप्ता के मुताबिक निमोनिया फेफड़ों का एक संक्रमण है। यह बैक्टीरिया की वजह से हो सकता है। इसकी वजह से फेफड़ों में सूजन और मवाद या तरल पदार्थ भर सकता है। निमोनिया किसी को हो सकता है, लेकिन छोटे बच्चों और बुजुर्गों में यह अधिक गंभीर हो जाता है। इसमें बुखार, खांसी, ठंड लगने, सांस लेने में समस्या, छाती में दर्द और भूख न लगने की समस्या हो सकती है।
केजीएमयू में बाल रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. शैली अवस्थी ने बताया कि छोटे बच्चों में निमोनिया कई बार जानलेवा साबित होता है इसकी वजह हाइपोक्सिमिया होता है। कोविड महामारी के बाद ऑक्सीमीटर का चलन बढ़ा है, लेकिन अभी भी हर जगह इसकी पहुंच नहीं है। ऐसे में यह माॅडल विकसित किया गया है। बच्चे में लक्षण के आधार पर जोखिम अंक की गणना करनी चाहिए। यदि कुल अंक पांच से ज्यादा है तो उसे तुरंत बड़े अस्पताल लेकर जाना चाहिए।