राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों को प्रवक्ता बनने की राह आसान होने जा रही है। अब रिक्तियों के आधार पर हर साल पदोन्नतियां दी जाएंगी।
इसके लिए उत्तर प्रदेश विशेष अधीनस्थ (प्रवक्ता संवर्ग) सेवा नियमावली बदलने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। शीघ्र ही कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी है।
नई नियमावली बनने के बाद राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत करीब 3000 शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो जाएगा। पदोन्नति के बाद शिक्षकों के वेतन में 4000 से 5000 रुपये का इजाफा होगा।
22 साल पहले बनी थी नियमावली
उत्तर प्रदेश में राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत लाइसेंसिंग ऑफ टीचिंग सार्टिफिकेट (एलटी) ग्रेड से प्रवक्ता संवर्ग में पदोन्नति देने की व्यवस्था है।
इसके लिए उत्तर प्रदेश विशेष अधीस्थ (प्रवक्ता संवर्ग) सेवा नियमावली वर्ष 1992 में बनाई गई थी। उस समय उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था।
पदोन्नति कमेटी में अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, अपर निदेशक पहाड़, अपर निदेशक महिला तथा अपर निदेशक बेसिक शिक्षा को रखा गया। यह कमेटी अधीनस्थ सेवा आयोग के अधीन काम करती थी।
माया सरकार ने भंग किया अधीनस्थ सेवा आयोग
इस बीच उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड अलग हो गया और वर्ष 2007 में तत्कालीन माया सरकार ने अधीनस्थ सेवा आयोग को भंग कर दिया। इसके चलते पदोन्नति कमेटी की बैठक नहीं हो पा रही है, जिससे राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नतियां रुकी हुई हैं।
शिक्षकों ने पदोन्नतियां शुरू करने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को ज्ञापन भी दिया था। इसके आधार पर अब नियमावली बदली जा रही है।
अब इसे उत्तर प्रदेश लेक सेवा आयोग के अधीन काम करने और पदोन्नति कमेटी से अपर निदेशक पहाड़ को हटाने का प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट से मंजूरी के बाद राजकीय इंटर कॉलेजों में पदोन्नति की प्रक्रिया फिर से शुरू हो जाएगी। गौरतलब है कि वर्ष 2008 से एलटी शिक्षकों की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति नहीं हुई है।