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इंतजाम नाकाफी, पुराने शहर में पानी के लिए हाहाकार

Tue, 10 Dec 2013 08:31 AM IST
नरेंद्र नरायण मिश्र/लखनऊ
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पुराने शहर के ज्यादातर इलाकों में सोमवार दोपहर के बाद पानी की आपूर्ति का बुरा हाल हो गया। इसके साथ ही जलसंस्थान और जलकल विभाग के वैकल्पिक इंतजाम के दावे भी हवा हो गए।
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जल संस्थान ने 609 ट्यूबवेल से सीधी जलापूर्ति दिए जाने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि जल संस्थान के कई ट्यूबवेल खराब पड़े हैं।

पाइप लाइन बदलने का काम दोपहर 12 बजे शुरू हुआ लेकिन इससे पहले भी 11 बजे तक आधी अधूरी जलापूर्ति ही की गई। लेकिन शाम को पुराने शहर के ज्यादातर इलाकों में पानी न आने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।

उधर कुछ इलाके लोगों का कहना है कि उनके यहां पानी आया तो लेकिन बहुत कम प्रेशर से। इससे पहले ऐशबाग जलकल से जुड़े पांच जोनल पंपिंग स्टेशन वाले क्षेत्र राजेंद्र नगर, लालबाग, हैवलक रोड, केकेसी, मीराबाई मार्ग पर लोग सुबह से ही पानी स्टोर करने में जुटे रहे।
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ऐशबाग जलकल से आधे शहर को की जाने वाली जलापूर्ति सोमवार दोपहर बाद तीन दिनों केे लिए ठप कर दी गई। इसी के साथ जल संस्थान ने अधूरी तैयारियों के बीच रॉ-वाटर आपूर्ति का ब्रेकडाउन कार्यदायी संस्था जलनिगम को दे दिया।

इसके बाद गऊघाट रॉ-वाटर पंपिंग स्टेशन परिसर में दोपहर 12 बजे से पाइप लाइन कटिंग का काम शुरू हुआ। यहां से ऐशबाग जल शोधन संयंत्र तक बिछाई गई पाइप लाइन को पंपिंग स्टेशन से कनेक्शन का कार्य जलनिगम के उच्चाधिकारियों की देखरेख में कराया जा रहा है।

ऐशबाग जलकल से ब्रेकडाउन होने से पहले भी कम दबाव में पानी की आपूर्ति की गई। रॉ-वाटर पाइप लाइन को जोड़ने के लिए सुबह से शुरू हुई कवायद के चलते पंपों से की जाने वाली आपूर्ति समुचित नहीं हो पाई।

ट्यूबवेल की खराबी ने पानी संकट और बढ़ा दिया। ब्रेकडाउन के दौरान ही कई मोहल्लों में जलकल से की जाने वाली आपूर्ति के प्रेशर को बढ़ाने में मददगार मोटर पंप खराब हो गए। इससे मोहल्लों में जलापूर्ति व्यवस्था ध्वस्त हो गई।

चौपटियां रोड पर स्थित कक्कड़ पार्क में लगे ट्यूबवेल की मोटर जल गई। इसके अलावा केकेसी के समीप एक पंप, राजेंद्र नगर में एक पंप, बुलाकी अड्डा व टिकैतराय तालाब के समीप एक पंप में खराबी आने की बात सामने आई।
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इससे जियालाल फाटक, सिरका वाली गली, ठाकुरगंज तिराहा, संदोहनदेवी मंदिरलेन, फूलवाली गली इलाके में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस गए।

यहां के गौरीशंकर, महाबीर प्रसाद, अमित, विजय ने बताया कि अचानक जलापूर्ति बंद हो जाने से वे लोग जरूरत भर का पानी भी भरकर रख नहीं पाए।
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