कहने को तो मेट्रो फिलहाल पुराने शहर की ओर नहीं जा रही है, मगर उसका दूसरा स्वरूप शहर वालों को डालीगंज तक जरूर ले जाएगा।
यहां जमीन के साथ ही पानी में दौड़ेगी मेट्रो। यह नजारा आने वाले कुछ सालों में केडी सिंह बाबू स्टेडियम चौराहे के पास देखने को मिलेगा।
यहां ऊपर मेट्रो स्टेशन होगा जबकि, पुल के नीचे सनेही घाट पर वाटर मेट्रो का जंक्शन बनेगा। जो कि लोगों को डालीगंज पुल तक का सफर कराएगी।
रिवर फ्रंट डवलपमेंट स्कीम के तहत वाटर मेट्रो के कांसेप्ट को जोड़ा जा रहा है। फिलहाल रिवर फ्रंट डवलपमेंट के पहले चरण में 1.7 किलोमीटर की दूरी तक गोमती के घाटों को शानदार तरीके से विकसित किया जाना है।
पुराने प्रस्तुतीकरण को थोड़ा और आगे बढ़ाते हुए जर्मन आर्किटेक्ट कंसलटेंट कंपनी ने अब यह तय कर दिया है कि कहां पर कौन सा आकर्षण होगा।
इसमें सबसे बड़ा आकर्षण वाटर मेट्रो जोड़ा गया है। इसके अलावा अवध हाट एंड कल्चलर सेंटर, लखनऊ आई, हाट एयर बैलून और बर्ड्स आई व्यू को जोड़ा गया है।
यह पूरी प्लानिंग बहुत जल्द मुख्यमंत्री के समक्ष पेश की जाएगी। पिछले करीब डेढ़ साल से रिवर फ्रंट डपलपमेंट की कवायद बहुत तेजी से चल रही थी।
हाइड्रोलॉजिकल सर्वे रिपोर्ट आने के बाद में फाइनल प्लानिंग कर ली गई है। अब मुख्यमंत्री का एप्रूवल ही बाकी है। नई प्लानिंग के हिसाब से डालीगंज पुल से लेकर हनुमान सेतु तक पहले चरण में 1.7 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच का सुंदरीकरण होगा।
गोमती के बाएं किनारे पर इस स्कीम के लिए 12.88 एकड़ और रिवर बेड में 22.56 एकड़ भूमि ली जाएगी। लोअर बैंक में 7.69 एकड़ भूमि प्राधिकरण लेगा। जिस पर विकास कार्य किया जाएगा।
सबसे खास होगी वाटर मेट्रो
रिवर फ्रंट डवलपमेंट में सबसे खास बिंदु वाटर मेट्रो का जोड़ा गया है। 1.7 किलोमीटर के स्ट्रेच में केवल एक मेट्रो स्टेशन पड़ेगा।
यह स्टेशन केडी सिंह बाबू स्टेडियम चौराहे का होगा। स्टेडियम के स्टेशन के ठीक नीचे वाटर मेट्रो जंक्शन बनाया जाएगा। वाटर मेट्रो टैक्सी यहीं से चलेगी।
जिसका रूट सनेही घाट, लखनऊ आई, अवध हाट, शहीद स्मारक और कॉमर्शियल कांप्लेक्स से डालीगंज तक होगा। इन सभी घाट पर वाटर मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे।
इसका अर्थ है कि अमौसी से केडी सिंह बाबू स्टेडियम तक सामान्य मेट्रो पर और अगर यहां से डालीगंज की ओर जाना हो तो वाटर मेट्रो के जरिए लोग सफर कर सकेंगे।