घरों में पानी का मीटर लगाने का फैसला मिनी सदन यानी नगर निगम सदनों में किया जाएगा।
मेयर काउंसिल ने साफ कह दिया है कि शहरी लोगों को सुविधाएं देने का निर्णय नगर निगम कार्यकारिणी और सदन करता है, तो किसी भी तरह का बोझ डालने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार उसी का है।
मेयर काउंसिल ने यह भी कहा है कि सरकार को आय के संसाधन बढ़ाने के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
प्रदेश के सात शहरों आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी व मथुरा में जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना के तहत कई काम चल रहे हैं।
केंद्र सरकार की शर्तों के मुताबिक जिस शहर में जेएनएनयूआरएम योजना का काम चल रहा है, वहां घरों में पानी का मीटर लगाया जाना है।
इसे देखते हुए राज्य सरकार ने जल निगम के प्रबंध निदेशक को इन शहरों में पानी का मीटर लगाने का आदेश जारी कर दिया है।
मीटर लगाए जाने के बाद नए टैरिफ के अनुसार वाटर टैक्स वसूला जाएगा। इससे डेढ़ से दो गुना तक वाटर टैक्स बढ़ जाएगा।
उत्तर प्रदेश मेयर काउंसिल वाटर टैक्स बढ़ाए जाने के विरोध में है। काउंसिल के अध्यक्ष व लखनऊ के मेयर डॉ. दिनेश शर्मा कहते हैं कि निकायों में आय के संसाधन बढ़ाने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
वाटर टैक्स बढ़ाकर जनता पर बोझ नहीं डालना चाहिए। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि चाहे मीटर लगाना हो या फिर वाटर टैक्स बढ़ाना, इन पर निर्णय का अधिकार नगर निगम कार्यकारिणी और सदन को है।
सदन में जो भी निर्णय होगा, उसके अनुसार ही काम की अनुमति दी जाएगी। वहीं, प्रमुख सचिव नगर विकास सीबी पालीवाल कहते हैं कि पहले चरण में घरों में वाटर मीटर लगाने का निर्णय किया गया है।
वाटर मीटर लगाने के बाद टैक्स बढ़ाने पर निर्णय होगा। रही बात वाटर मीटर लगाए जाने की, तो इससे किसी के ऊपर कोई बोझ पड़ने वाला नहीं है।