लखनऊ। आयुर्वेद कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने शोध में यह पाया कि जलकुंभी भस्म का प्रयोग करने से थायराइड में काफी आराम मिलता है। यह जानकारी रविवार को टुड़ियागंज राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के काय चिकित्सा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कमल सचदेवा ने दी। वह विश्व संवाद केंद्र में चरक जयंती समारोह के मुख्य वक्ता थे। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. रामबाबू द्विवेदी मौजूद रहे।
डॉ. सचदेवा ने कहा कि जलकुंभी भस्म, पिप्पली आदि दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की देखरेख में करने से बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। गोमूत्र से शुद्धि व शोधन के बाद भस्म बनाई जाती है।
मुख्य अतिथि डॉ. रामबाबू द्विवेदी ने चरक संहिता में वर्णित शुभ अशुभ लक्षणों के बारे में बताया। कार्यक्रम में डॉ. प्रभुनाथ दास, डॉ. श्वेता सिंह, वैद्य कुंवर पंकज, डॉ. आरसी वर्मा, डॉ. जेपी पांडेय, डॉ. यूए खान , 70 विद्यार्थी एवं 45 आयुर्वेद डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। इस दौरान अवध प्रांत में स्थापित सरकारी व निजी आयुर्वेद कॉलेज के बैच 2022 के छात्र-छात्राओं को चरक संहिता में अधिकतम अंक प्राप्त करने पर बाल चरक सम्मान-2025 से सम्मानित किया गया।