शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी
- फोटो : amar ujala
शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर अयोध्या में बाबरी मस्जिद से सुन्नी वक्फ बोर्ड की दावेदारी रद्द करने की मांग की है।
उन्होंने सुन्नी वक्फ बोर्ड की दावेदारी फर्जी करार देते हुए दावा किया कि शिया मुसलमान की ओर से बनवाई मस्जिद वक्फ कानून के मुताबिक शिया वक्फ कहलाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से बोर्ड के समझौता प्रस्ताव के मुताबिक कानून बनाने की मांग की।
रिजवी ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर अवगत कराया कि अयोध्या में वर्ष 1528 में बाबर के सेनापति मीरबाकी ने राम मंदिर को तोड़कर उसी के मलबे से विवादित मस्जिद बनाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने एक अधिसूचना के जरिये 26 फरवरी 1944 को इसे सुन्नी वक्फ घोषित कर न्यायालय में अपना हक जताकर लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा, मीरबाकी शिया मुसलमान था। वक्फ के नियमानुसार, शिया समाज के व्यक्ति द्वारा वक्फ की श्रेणी में आने वाले धार्मिक स्थल का यदि कोई निर्माण कराया जाता है तो उसे शिया वक्फ ही माना जाएगा।
उन्होंने बताया कि शिया वक्फ बोर्ड ने साधु-संतों और राम मंदिर निर्माण के पक्षकारों से 2017 में बातचीत कर एक समझौता तैयार किया था। इसका नाम ‘एक रास्ता एकता की ओर’ रखा गया।
समझौते में तय हुआ कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण हो और लखनऊ में चिह्नित किसी स्थान पर शिया वक्फ बोर्ड मस्जिद-ए-अमन का निर्माण करा लेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि अगर कोई कानूनी अड़चन न हो तो उक्त समझौते के आधार पर कानून बनाकर मंदिर निर्माण शुरू किया जाए।