इसमें बताया गया था कि छात्रों ने लखनऊ बंद का आह्वान किया था। गोकरन नाथ तिकोनिया पार्क चौराहे पर आरोपी अपने साथी छात्रों के साथ हाथों में तमंचा व लोहे की रॉड लिए दुकानदारों को गोली मारने की धमकी देने के साथ ही दुकानें बंद करा रहे थे।
इससे दुकानदारों व ग्राहकों में डर पैदा हो गया और भगदड़ मच गई। रास्ता भी अवरुद्ध हो गया। जब पुलिस ने रोकने का प्रयास किया तो अभियुक्तों ने जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया। वहीं अन्य उपद्रवी छात्राें ने पत्थर से हमला किया।
इनके हमले से बचते हुए जब इनका पीछा किया गया तो छात्रावास की तरफ भाग गए। 2 नवंबर 1991 को अदालत ने इनके खिलाफ दाखिल आरोप पत्र पर संज्ञान लिया, लेकिन गैरहाजिर रहने के चलते आरोप तय नहीं हो सका है।