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लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राक्टर के खिलाफ वारंट

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लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर के खिलाफ वारंट
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अदालती आदेशों की अनदेखी पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
19 सितंबर को अदालत के सामने हाजिर होने को कहा गया
अदालत के आदेशों को लगातार अनदेखा किए जाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर विनोद सिंह के खिलाफ वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह 19 सितंबर को अदालत के सामने पेश हों।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने ये आदेश लविवि में कर्मचारी त्रिपुरारी की याचिका पर दिए। याची ने प्रोन्नति न किए जाने पर पहले विवि में प्राधिकारियों को प्रत्यावेदन दिए और जब सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। रिट कोर्ट ने 19 दिसंबर 2018 को याची के मामले में चार सप्ताह में फैसला करने के निर्देश दिए थे। लविवि प्रशासन की ओर से तय समय में कोई कदम न उठाए जाने पर याची ने हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका की थी। इस पर हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल को नोटिस जारी करने के निर्देश देते हुए कहा था कि अदालत के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करने कर क्यों न विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर विनोद सिंह को दंड दिया जाए। प्रॉक्टर को वकील के या निजी तौर पर हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
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हालांकि, तय समयसीमा में ऐसा नहीं किया गया। इस पर भी कोर्ट ने 31 जुलाई को प्रॉक्टर को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का एक और अवसर दिया। कोर्ट ने तब यह भी कहा था कि इसके बाद कोई और मौका नहीं दिया जाएगा। बावजूद इसके दो सितंबर को सुनवाई के दौरान प्रॉक्टर की ओर से न हलफनामा दाखिल किया गया और न ही कोई हाजिर हुआ। इस पर कोर्ट ने कहा कि बार-बार नोटिस देने पर भी प्रॉक्टर हाजिर नहीं हुए। ऐसे में उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें सुनवाई की अगली तिथि पर कोर्ट के सामने पेश होने के आदेश दिए जाते हैं। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) को अवमानना के आरोपी के खिलाफ वारंट जारी करने को कहा गया है।
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