अब शुरू हो सकेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रोजेक्ट पर काम
लविवि के 10 विभागों को 31 मार्च को जारी हुआ था बजट, वित्तीय वर्ष खत्म होने के कारण नहीं हो सका था प्रयोग
विवि के पत्र पर शासन ने इस वित्तीय वर्ष में प्रयोग को दी हरी झंडी
लखनऊ विश्वविद्यालय के 10 विभागों के 12 प्रोजेक्ट को पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए मिले बजट को लेकर पांच महीने से चल रही ऊहापोह अब खत्म हो गई है। शासन ने इसके लिए जारी बजट को वित्तीय वर्ष 2019-20 में खर्च करने पर सहमति दे दी है। इसके बाद विवि में कार्ययोजना तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत चयनित विभिन्न विषयों पर कार्य हो सकेंगे।
विवि के दस विभागों के 12 प्रोजेक्ट को मार्च में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मिला। इसके लिए निर्धारित राशि 31 मार्च को जारी हुई, जिसकी वजह से नए वित्तीय वर्ष में उसका प्रयोग नहीं किया जा सकता था। काफी दिनों तक जब विभागों को बजट नहीं मिला तो उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया, जिसके बाद विवि प्रशासन ने शासन स्तर पर संपर्क किया। इस क्रम में हुए पत्राचार के बाद अब शासन से जारी बजट को इस वित्तीय वर्ष में प्रयोग करने को हरी झंडी दे दी गई है।
प्रति कुलपति प्रो. राजकुमार सिंह ने बताया कि शासन का इस संबंध में सहमति पत्र प्राप्त हो गया है। इससे जुड़ी आवश्यक कार्रवाई पूरी की जा रही है। जल्द ही विभागों को इसके बारे में सूचित कर उनसे रिवाइज प्लान मांगा जाएगा। इसके बाद उन्हें बजट दे दिया जाएगा। वह प्रस्ताव के अनुसार नियमानुसार बजट का प्रयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग कई अच्छे प्रस्तावों पर काम करेंगे।
उर्दू विवि भी शामिल
योजना के तहत राजधानी के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के भी दो विभागों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मिला था। इसमें कॉमर्स विभाग को 7.25 लाख और अरेबिक विभाग को 5 लाख रुपये स्वीकृत था। जहां एंटरप्रेन्योरियल डवलपमेंट व अरेबिक स्टडीज के तहत काम होगा।
विभाग- स्वीकृत बजट
बॉटनी- 20 लाख
पत्रकारिता- 5.50 लाख
ओएनजीसी सेंटर- 20 लाख और 17 लाख
फिजिक्स- 17 लाख
एंथ्रोपोलॉजी- 6 लाख
समाजशास्त्र- 11 लाख
समाजकार्य- 7 लाख
कॉमर्स- 16 लाख
मानव विज्ञान- 7.50 लाख
जंतु विज्ञान- 6.60 लाख और 6 लाख