लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की ओर से चल रहे तीन दिवसीय महिला उत्सव के दूसरे दिन भी नारी सशक्तीकरण के स्वर गूंजे। मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में लोक संस्कृति, महिला सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के विविध रंग देखने को मिले।
स्नेहिल श्रीवास्तव ने गणेश वंदना के साथ लोक गीतों से शुरुआत की। पूर्वी विधा में सइयां मिले लखनऊवा... गीत पर दर्शक झूम उठे। मीरा दीक्षित ने अपनी टीम के साथ मां दुर्गा के नौ रूपों की प्रस्तुति दी। कवि सम्मेलन में डॉ. शोभा दीक्षित ''''भावना'''' की कविता विधाता ने रची है सृष्टि पर आधार नारी है... ने महिलाओं की महत्ता को रेखांकित किया। डॉ. मानसी द्विवेदी ने पढ़ा - मैंने देखा ही नहीं पांव के छालों की तरफ...। प्रियंका राय ने पढ़ा- शुभ लगन बेटियां शुभ मुहूर्त सी हैं, इस धारा के लिए एक जरूरत सी हैं…। सरोज सरगम ने भी रचनाएं सुनाईं। इस दौरान मीना सोनी, वर्षा वर्मा, उषा विश्वकर्मा, शैली शारदा और अलका गुरनानी आदि महिलाओं को सम्मानित किया गया।