लखनऊ। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में मंगलवार को ‘अहिंसामयी जीवन का आधार, परस्पर सद्भाव और सौहार्द’ विषय पर परिचर्चा हुई। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रचार प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए उन्हीं शब्दों का प्रयोग करना चाहिए, जिसमें उनका सम्मान निहित हो। विचारों का तालमेल भले ही न हो, लेकिन सम्मान जरूर होना चाहिए। सभी मानव जीवन को बुद्ध ने यही उपदेश दिया था। उन्होंने समाज को सशक्त बनाने की दिशा में एकजुट होने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जैन शोध संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अभय जैन ने की। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा के सिद्धांत को महत्वपूर्ण बताया। महावीर स्वामी की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए परस्पर सौहार्द और सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह आयोजन हमें सिखाता है कि हम सभी को मिलकर एक ऐसे समाज की रचना करनी है, जहां सद्भाव, सौहार्द और अहिंसा का वातावरण हो। यही हमारे देश की विशेषता है। इस दौरान जैन विद्या शोध संस्थान के निदेशक अमित अग्निहोत्री, राजेंद्र भी मौलूद रहे।