फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विवेक हत्याकांड: आरोपी सिपाही का समर्थन करने वालों को कल्पना ने सुनाई खरी-खोटी

Wed, 03 Oct 2018 10:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना
विज्ञापन

विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना का कहना है कि वह पुलिस में नहीं हैं, लेकिन इतना पता है कि उस वक्त क्या करतीं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके पति अगर रात को किसी महिला के साथ कार में थे तो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी क्या थी?

विज्ञापन


वह कुछ गलत कर रहे थे तो उन्हें पकड़कर थाने ले जाना चाहिए था। घरवालों को सूचना देनी चाहिए थी। न कि सीधे गोली मारकर उनकी हत्या कर देनी चाहिए थी।

कल्पना ने सोशल मीडिया पर ऐसे सिपाही का समर्थन करने वालों पर शर्म आने की बात कही। कहा कि गलत किसके साथ हुआ है? जान किसकी गई है? लोगों को किसके साथ होना चाहिए? मुझे आश्चर्य है और शर्म आती है ऐसे लोगों पर जो हत्यारे का समर्थन कर रहे हैं।

सिपाही ने निहत्थे आदमी पर गोली चलाई है। एक हंसते-खेलते परिवार को बेसहारा कर दिया। दो बेटियों को अनाथ कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे लोगों को ब्रेवरी अवॉर्ड मिलना चाहिए?
विज्ञापन


क्या लोगों के भीतर थोड़ी सी भी इंसानियत नहीं बची, जो ऐसे हत्यारों के पक्ष में खड़े हो रहे हैं? आखिर उसने निहत्थे को गोली मारकर कौन सी बहादुरी दिखाई है? ये कैसे लोग हैं, कहने के लिए मेरे पास शब्द भी नहीं हैं।

Trending Videos

सोशल मीडिया का दुरुपयोग हो रहा, अधिकारियों को रोकना चाहिए

कल्पना ने कहा कि, उनके पति की हत्या के आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी का समर्थन करने वाले सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। पुलिस एक अनुशासित बल है, जबकि आरोपी सिपाही के साथी उसे निर्दोष बताने के साथ आला अधिकारियों पर टिप्पणी कर रहे हैं। यह अनुशासनहीनता है। आला अधिकारियों को इसे संज्ञान में लेकर रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस झंडा दिवस मनाती है। डीजीपी सिपाहियों के साथ बैठकर खाना खाते हैं। उनका मनोबल बढ़ाते हैं। इसका यह मतलब नहीं कि पुलिसकर्मी बेलगाम हो जाएं। गलतियों और अनुशासनहीनता में इनके खिलाफ कार्रवाई भी करनी चाहिए।
विज्ञापन

हत्यारोपी सिपाही का समर्थन करने वालों ने पार की मर्यादा की हदें

कल्पना ने कहा हत्यारोपी सिपाही प्रशांत चौधरी का समर्थन करने वालों ने मर्यादा की हदें पार कर दी हैं। ऐसे लोगों ने प्रशांत को बेगुनाह बताने के साथ ही उनके प्रति भी अभद्र बातें पोस्ट की हैं। यह सब देख और सुनकर मेरी तकलीफें बढ़ जाती हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया पर ही धमकाने वाले लेख लिख रहे हैं। इस पर भी पुलिस के आला अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें