प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज में अब तक हुए खर्च का मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति का आकलन कर ‘विजन पेपर’ तैयार करने का फैसला किया है। यह जिम्मेदारी गिरि विकास संस्थान को सौंपी गई है। संस्थान तीन महीने में प्रारंभिक और आठ महीने में पूरी रिपोर्ट देगा।
बुंदेलखंड पैकेज के रूप में बुंदेलखंड में पहले चरण में 1038.74 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। दूसरे चरण में नवंबर तक 86.22 करोड़ खर्च हुए। बावजूद इसके समस्याओं का उम्मीद के हिसाब से समाधान नहीं हुआ।
किसानों की मौत की खबरें आती रहती हैं। नतीजा ये होता है कि बुंदेलखंड सियासत का मुद्दा बनता रहता है। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि हाल के दिनों में इस पर गंभीरता से विचार हुआ कि सैकड़ों करोड़ खर्च के बावजूद नतीजे उम्मीद के हिसाब से क्यों नहीं आ रहे?
क्या योजनाओं में खामी है अथवा क्रियान्वयन सिस्टम ठीक नहीं है? इसके लिए केंद्र ने अपने स्तर पर नैपकॉन एजेंसी से सर्वे कराया। प्रदेश सरकार भी समय-समय पर अध्ययन कराती रहती है।