प्रदेश में अगले महीने से वाहनों के वीआईपी नंबर पाना काफी खर्चीला होगा। जुलाई से जिसकी ‘ऊंची बोली’ उसका वीआईपी नंबर की व्यवस्था लागू होने जा रही है।
इसके तहत चुनिंदा वीआईपी नंबरों की बोली लगाने के लिए सात दिन तक वेबसाइट खुली रहेगी और सबसे ज्यादा ऊंची बोली लगाने वाले को ही वीआईपी नंबर अलॉट किया जाएगा।
जिन वीआईपी नंबरों के लिए कम से कम तीन बोलियां नहीं मिलेंगी, उनकी तीन दिन तक दोबारा बोली लगवाई जाएगी। वाहन स्वामियों को सबसे पहले ऑनलाइन बुकिंग के जरिये वीआईपी नंबर हासिल करने की सुविधा जून तक ही मिल सकेगी।
परिवहन विभाग ने पंजाब व हरियाणा की तर्ज पर वीआईपी नंबरों को ऊंचे दामों पर बेच कर अधिक कमाई करने के लिए सोमवार से नीलामी सॉफ्टवेयर को बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सॉफ्टवेयर बनने में 15 से 20 दिन लगेंगे। इसके बाद ट्रायल होगा जिसमें सब कुछ दुरुस्त पाए जाने पर लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, बरेली, मेरठ महानगरों सहित सभी जिलों के परिवहन अफसरों को वीआईपी वाहन नंबरों की नीलामी करने के आदेश दे दिए जाएंगे।
नंबर की नीलामी की अधिसूचना हो चुकी है जारी
वीआईपी नंबर के लिए बोली लगाने से पहले वाहन स्वामी को संभागीय परिवहन कार्यालय में पंजीयन कराना होगा। यानी नए वाहन का पंजीयन शुल्क जमा होने के बाद वाहन स्वामी को आईडी मिलेगी, जिसके जरिये वे वेबसाइट पर वीआईपी नंबर की बोली लगा पाएंगे।
परिवहन विभाग के वीआईपी नंबर वर्तमान में 15,000, 7,500, 6,000, 3,000 रुपये में सबसे पहले ऑनलाइन बुक करने वाले को हासिल हो जाते हैं।
15 हजार रुपये में 1 से 9, 11, 22,33, 44 आदि और 786 जैसे नंबर मिलते हैं। नीलामी की प्रक्रिया शुरू होते ही मनचाहा नंबर हासिल करने के लिए लाखों रुपये चुकाने पड़ सकते हैं।
वीआईपी नंबर की नीलामी की अधिसूचना जारी हो चुकी है। 30 दिन के भीतर ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है।