यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम में मोटर वाहन अधिनियम की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके चलते लगातार हादसे हो रहे हैं। निगम अफसरों की लापरवाही के चलते डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक एक ड्राइवर से एक बार में एक-एक हजार किमी बस चलवा रहे हैं।
जबकि लंबी दूरी के लिए दो ड्राइवरों का प्रावधान है। इतना ही नहीं, एक हजार किमी बस चलाकर आने वाले ड्राइवर को 24 घंटे का आराम तब मिल पाता है, जब सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मेहरबान हों।
आगरा के एत्मादपुर नाला में गिरी जनरथ बस के चालक कृपाशंकर चौधरी काफी से दिनों से लगभग अकेले ही एक हजार किमी बस चला रहे थे।
चौधरी लखनऊ से गाजीपुर के बीच जनरथ चलाते थे। यह जनरथ लखनऊ से कानपुर जाती थी, फिर वहां से लौटते ही लखनऊ से सवारी लेकर गाजीपुर के लिए रवाना होती थी। इस तरह कृपाशंकर अकेले ही 900 किमी से अधिक बस चला रहे थे।
इसी तरह लखनऊ से जयपुर और लखनऊ से देहरादून चलने वाली जनरथ और साधारण सेवा की बस में भी एक-एक ड्राइवर तैनात किए गए हैं। इस रूट पर बस का आवागमन 1200 किमी से अधिक है।
चालकों व परिचालकों की कमी नहीं
परिवहन निगम में चालकों व परिचालकों की इतनी कमी नहीं है कि एक ही ड्राइवर से एक-एक हजार किमी बस का संचालन कराया जाए। खुद ड्राइवरों का कहना है कि लखनऊ से दिल्ली जाने वाली बस पर दो ड्राइवरों की तैनाती होती थी, लेकिन मुख्यालय के कुछ अफसराें के हस्तक्षेप के चलते यह व्यवस्था खत्म कर दी गई।
फैक्ट फाइल
रोडवेज बेड़े में कुल बसें 12,382
एसी बसें 721
अनुबंधित बसें 2,690
नियमित चालक 6,039
संविदा चालक 19,256
नियमित परिचालक 5,181
संविदा परिचालक 14,700
जांच रिपोर्ट आने पर दोषियों पर होगी कार्रवाई
परिवहन निगम के इतिहास में सड़क दुर्घटना में सर्वाधिक यात्रियों की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। हादसे की जांच हो रही है। इसकी रिपोर्ट आने पर प्रबंध निदेशक धीरज साहू द्वारा दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार वर्मा, मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) परिवहन निगम