लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने निजी अस्पतालों के पंजीकरण में खूब खेल किया है। विनोद हॉस्पिटल का संचालक नाम बदलकर सीएमओ ऑफिस में नए-नए पंजीकरण कराता रहा। सीएमओ ऑफिस के रिकाॅर्ड में दो नामों से विनोद हॉस्पिटल का रिकाॅर्ड मिला है। अफसरों का कहना है कि पहला अस्पताल दो साल पहले बंद हो चुका था, जबकि दूसरा अस्पताल अब बंद कराया गया है।
गोमतीनगर के खरगापुर कौशलपुरी निवासी नीरज मिश्रा (35) वर्ष 2022 में सड़क हादसे में जख्मी हो गए थे। लोगों ने उन्हें विनोद हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। यहां के डॉक्टर ने उनका पैर का ऑपरेशन कराया और वह करीब 14 दिन तक भर्ती रहे, मगर डिस्चार्ज होने के बाद उनकी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ गई थी। एक-एक कर आठ ऑपरेशन हो गए थे। पीड़ित ने मामले की शिकायत सीएमओ ऑफिस में दर्ज कराई थी।
शिकायत के बाद विनोद हॉस्पिटल ने दो साल पहले अस्पताल बंद कर दिया था। इसके बाद नाम बदलकर विनोद जच्चा- बच्चा केंद्र के नाम से नया पंजीकरण करा लिया था। कमेटी ने 18 जुलाई को अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर खानापूर्ति कर दी थी।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि विनोद हॉस्पिटल का संचालन दो साल पहले बंद हो चुका था। विनोद जच्चा-बच्चा केंद्र अब बंद कराया गया है। अब शिकायत मिली है कि अस्पताल का अब एक अन्य नाम से पंजीकरण कराया गया है। मामले की गहनता से जांच कराई जा रही है। डॉ. विनोद की तीसरे हॉस्पिटल में संलिप्तता मिली तो उसे भी बंद कराया जाएगा।