मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि विकास दर की कुंजी और तरक्की की भूख गांवों में है। महंगाई भी गांव ही रोक सकते हैं। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और खुशहाली गांवों पर निर्भर होती है। गांव खुशहाल तो देश खुशहाल। गांवों के बिना देश की तरक्की नहीं है।
भारतीय रिजर्व बैंक और बड़े-बड़े अर्थशास्त्री कहते हैं कि मौसम ठीक रहा तो अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा। ग्रोथ रेट बढ़ जाएगी। इससे साफ है कि विकास दर गांवों में ही है। विकास की भूख भी गांवों में ज्यादा है। जो कहानी शहरों में हैं, वह गांवों में भी है।
फिल्मों की कहानी भी गांवों में हैं। गांवों की अर्थव्यवस्था ज्यादा मजबूत है, लंबे समय तक टिकने वाली है। गांव बढ़ेंगे तो शहर बढ़ेंगे। लखनऊ में बैठकर बहुत सारी चीजें महंगी लगती है।
20-30 किमी दूर चले जाइए, सस्ता और अच्छा दूध मिल जाएगा, गांवों में सब्जियां भी सस्ती हैं। मुख्यमंत्री शनिवार को अपने आवास पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
मुंबई, दिल्ली से बेहतर है लखनऊ
अखिलेश यादव ने कहा कि लखनऊ में शहर को शहर बनाने वाली हर चीज है। जो एक बार लखनऊ आ जाता है, फिर इसे छोड़ नहीं सकता। लखनऊ क्या यूपी की भी यही स्थिति है। बिना यूपी के मुंबई की कोई फिल्म नहीं चल सकती। यूपी के बिना तो दिल्ली में प्रधानमंत्री भी नहीं बन सकता।
प्रिंट मीडिया ज्यादा विश्वसनीय
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग लिखी हुई चीजों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। डिजिटल या टीवी न्यूज कभी भी बदली जा सकती है लेकिन अखबारों में छपी खबरों को बदला नहीं जा सकता। भाषा और शब्दों की ज्यादा जानकारी भी अखबारों से बढ़ती है।
लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री शिवपाल ने कहा कि कुछ कमियों के बावजूद प्रिंट मीडिया का बड़ा महत्व है। तुलनात्मक तौर पर देखें तो प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता इलेक्ट्रानिक मीडिया से ज्यादा है। उन्होंने कहा, एक बदलाव यह आया है कि पहले लोग अखबारों को पढ़ने में बहुत समय लगाते थे, अब वे अखबार देखने लगे हैं।
गांधी के बाद समाजवादियों ने की गांवों की बात
वरिष्ठ साहित्यकार और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आज के ही दिन ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा देने वाले महात्मा गांधी कहते थे कि असली हिंदुस्तान गांवों में बसता है। महात्मा गांधी के बाद समाजवादियों ने ही गांव की बात की।
डॉ. लोहिया की सप्त क्रांतियां गांवों के बिना अधूरी हैं। उन्होंने कहा, सपा ने हिंदी और भारतीय भाषाओं का जितना सम्मान किया, उतना किसी और सरकार ने नहीं किया।